
यदि आप अपने घर के लिए बैंक से कर्ज लेते हैं और उसकी मियाद पूरी होने से पहले पूरा कर्ज चुका देते हैं, तो उस पर लगाई जाने वाली पेनाल्टी को देश के निजी बैंक कारोबार के हिसाब से सही मानते हैं। देश के प्रमुख निजी बैंक अपने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए समय से पहले कर्ज चुका देने पर उनसे प्री-पेमेंट पेनाल्टी लेते हैं। इसके तहत ग्राहक कर्ज की बाकी बची रकम पर शून्य से दो फीसदी तक पेनाल्टी बैंक को देता है। एक निजी बैंक के अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर होम लोन पर ली जाने वाली प्री-पेमेंट पेनाल्टी को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि जब बैंक किसी ग्राहक को कर्ज देते हैं तो उससे पहले सारी जांच-पड़ताल की जाती है। ऐसे में ये ग्राहक प्रतिद्वंद्वी बैंकों के लिए पूरी तरह से सूचित ग्राहक हो जाते हैं जिन्हें वे कम ब्याज दर का आकर्षण देकर अपना ग्राहक बना लेते हैं। बीच में ही ग्राहक के हट जाने से बैंक के प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, एक यह बात भी है कि बैंक जांच-पड़ताल के लिए प्रोसेसिंग शुल्क ग्राहक से ही लेते हैं। इस समय हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) शून्य से लेकर दो फीसदी तक प्री-पेमेंट पेनाल्टी लेता है। इसके तहत अगर कोई उपभोक्ता लोन शुरू होने के तीन साल के भीतर कर्ज की राशि लौटाता है तो एचडीएफसी 25 फीसदी राशि पर कोई पेनाल्टी नहीं लेता है, बशर्ते कि वह कर्ज की राशि अपनी बचत से लौटाए। पच्चीस फीसदी से अधिक की अतिरिक्त राशि पर दो फीसदी पेनाल्टी ली जाती है। यदि उपभोक्ता तीन साल बाद अपनी बचत से कर्ज चुकाता है तो उससे कोई पेनाल्टी नहीं ली जाती है। यदि उपभोक्ता किसी और बैंक से कर्ज लेता है या रिफाइनेंस कराता है तो उस पर एचडीएफसी दो फीसदी की पेनाल्टी लेता है।
इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक सर्विस टैक्स के साथ कर्ज की राशि का 2.21 फीसदी बतौर पेनाल्टी लेता है, चाहे उपभोक्ता मियाद पूरे होने से पहले कभी भी कर्ज की राशि चुकाए। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) वाहनों पर चार फीसदी तक प्री-पेमेंट पेनाल्टी लेती हैं। एक एनबीएफसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि प्री-पेमेंट पेनाल्टी लेना जायज है। इससे अन्य कंपनियों द्वारा हमारे ग्राहकों को तोड़ने पर रोक लगती है।s.prashant@businessbhaskar.net