Sensex up by 507 points
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Source: Agency
Published: November 05

सरकारी भरोसे से बाजार को बढ़त का टॉनिक


पिछले 11 कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के बाद बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 3.3 फीसदी या 507.19 अंकों की बढ़त के साथ 15,912.13 अंकों पर बंद हुआ। पिछले साढ़े तीन महीनों में यह सबसे बड़ी बढ़त रही। जानकारों के मुताबिक एक दिन पहले सरकार द्वारा आर्थिक राहत पैकेज जारी रखने के भरोसे को बाजार ने सकारात्मक तरीके से लिया है। लिहाजा सेंसेक्स बढ़त बनाने में कामयाब रहा। इस दौरान निफ्टी भी 3.22 फीसदी या 146.90 अंकों की बढ़त के साथ 4,710.80 अंकों पर निपटा।

गौरतलब है कि एक दिन पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सूखा और वैश्विक आर्थिक हालातों को देखते हुए आर्थिक पैकेज जारी रखने का भरोसा जताया था। इस भरोसे का जादू बाजार पर इस कदर चढ़ा कि शुरू में ही सेंसेक्स करीब 80 अंकों की बढ़त के साथ खुला और इंट्रा डे में यह लगातार बढ़त बनाने में कामयाब रहा। इस दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्सों में बढ़त दिखी। रियल्टी की अगुवाई में मेटल, आईटी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स ने बढ़त को हवा दी। पिछले कई सत्रों से लगातार गिर रहे रियल्टी इंडेक्स में 9.65 फीसदी की उछाल आने से यह 3,786.82 अंकों पर बंद हुआ। वहीं मेटल इंडेक्स 5.36 फीसदी की बढ़त के साथ दूसरे पायदान पर रहा। यह 702.64 अंकों की बढ़त लिए 13,110.68 अंकों पर बंद हुआ। इस दौरान आईटी इंडेक्स में 3.99 फीसदी की तेजी आने से यह 4,273.38 अंकों पर बंद हुआ। ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 3.83 फीसदी की बढ़त होने से यह 9,394.82 अंकों पर बंद हुआ। मिडकैप 3.29 फीसदी की बढ़त के साथ 5,994.40 अंकों पर और स्माल कैप 2.8 फीसदी की तेजी लिए 6,888.53 अंकों पर बंद हुआ। जानकारों के मुताबिक सेंसेक्स में सबसे ज्यादा योगदान वाले आरआईएल के शेयर में 5.5 फीसदी की उछाल आने की वजह से यह 1,920.65 रुपये पर बंद हुआ। मंगलवार को इसमें 5.7 फीसदी की गिरावट दिखी थी। माना यह जा रहा है कि अनिल और मुकेश समूहों के बीच चल रहे विवाद की सुनवाई कर रहे जज के बेंच छोड़ने से कंपनी के शेयरों पर नकारात्मक असर पड़ा था।

टाटा असेट मैनेजमेंट के एमडी वेद प्रकाश चतुर्वेदी के मुताबिक विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से बाजार को सहारा मिला है। पिछले गिरावट में विदेशी बाजारों का भी योगदान था। के आर चोकसी शेयर्स के एमडी देवेद चोकसी ने बताया कि निचले स्तरों पर शॉर्ट कवरिंग होने से बढ़त हुई है। उन्होंने बताया कि आगे के लिए बाजार के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। एफआईआई की लिवाली की वजह से बाजार को दम मिला है। इस साल जनवरी से अबतक करीब 14 अरब डॉलर का एफआईआई का निवेश हो चुका है। इससे सेंसेक्स में इस साल 65 फीसदी की बढ़त दिखी है। चोकसी के मुताबिक बुधवार की बढ़त कितनी टिकऊ है, यह बड़ा सवाल है। आईटी कंपनियों के शेयरों में महज विकास दर बने रहने की उम्मीदों से तेजी आई है। इन्फोसिस के शेयर भाव में 4.7 फीसदी का उछाल आने से यह 2,239.60 रुपये पर बंद हुआ। वहीं टीसीएस तीन फीसदी की तेजी के साथ 625.85 रुपये पर निपटा। जेएम फाइलनेंशियल के विश्लेषक बैंकिंग, वित्तीय और बीमा कंपनियों से काम मिलने की वजह से इन्फोसिस के शेयर में बढ़त की काफी गुंजाइश है।

इंफ्रा सेक्टर में जेपी एसोसिएट्स 9.4 फीसदी की उछाल के साथ 212.65 रुपये पर बंद हुआ। अक्टूबर में सीमेंट कंपनियों की बिक्री बढ़ने से भी इंफ्रा और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर असर पड़ा है। इस बीच महिंद्रा सत्यम 4.2 फीसदी की तेजी के साथ 103.15 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी को विदेशों में काम मिलने से इसके शेयरों पर असर पड़ा है। गिरावट वाले शेयरों में सुजलॉन एनर्जी में सबसे ज्यादा 5.3 फीसदी की गिरावट रही। यह शेयर 55.15 रुपये पर बंद हुआ। ऑर्डर में देरी और खराब वित्तीय नतीजों की वजह से कंपनी का शेयर लगातार बिकवाली का शिकार हो रहा है। वाल्यूम के लिहाज से देखा जाए तो, सबसे ज्यादा सुजलॉन एनर्जी के 3.27 करोड़ शेयरों में कारोबार हुआ। 1.79 करोड़ शेयरों में कारोबार वाली यूनिटेक दूसरे पायदान पर रही। वहीं रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज के 1.06 करोड़ शेयरों में कारोबार हुआ।

बाजार के हलचल को भी भुनाएं
बाजार में बुधवार को तेजी दिखी। हालांकि मौजूदा समय में बाजार में भारी हलचल है। हम निवेशकों को पहले से ही सुझाते आ रहे हैं कि, उन्हें हर तेजी पर मुनाफावसूली करनी चाहिए। लेकिन गिरावट के वक्त खरीदारी से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। हालांकि ऐसे में माहौल में सचेत रहना भी जरुरी है। नए निवेश के लिए निवेशकों को अब अगली गिरावट के लिए इंतजार करनी चाहिए। गिरावट आने पर ही खरीदरी करें। मौजूदा समय में बाजार में धैर्य और उत्साह को अपनाकर बेहतर मुनाफा काटा जा सकता है। आने वाले दिनों में भी बाजार में कुछ बुरे दौर दिख सकते हैं।

लेकिन आगे के लिए रुझान सकारात्मक है। बुरी खबरों में ब्याज दरों को लेकर बाजार में संशय बने रहना भी शामिल है। ऐसे में गिरावट दिख सकती है। पश्चिमी देशों के बाजारों की हालत भी अस्थिर है। ऐसे में एक निवेशक को उम्दा स्टॉक की पहचान कर हर हफ्ते निवेश करना चाहिए। हालांकि आमतौर पर गिरावट के दौरान बाजार बेहद पेनिक हो जाता है। ऐसे में देश के विकास दर को जेहन में रखते हुए साहस और धैर्य से निवेश करने की जरुरत है।

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