नई दिल्ली.लोकसभा में सोमवार को विश्वास मत पर बहस में भाग लेने के लिए कोर्ट की विशेष अनुमति पर जमानत लेकर जेल से छूटे सांसदों पर सबकी निगाहें टिकी थीं। राजद के दो बाहुबली सांसदों मोहम्मद शहाबुद्दीन और राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को कैमरे में कैद करने के लिए तो फोटोग्राफरों में होड़ मच गई।
अतीक अहमद(सपा )
इन पर बसपा विधायक की हत्या का आरोप है। अब ये बसपा के खेमे में हैं जिन्हें मायावती ने बुनकर हथकरघा आयोग का उपाध्यक्ष बनाने का आश्वासन दिया है।
पप्पू यादव (राजद )
मधेपुरा से सांसद हैं। सीपीआईएम के विधायक अजीत सरकार की हत्या का आरोप है। फरवरी 2008 में सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
सूरज भान (लोजपा)
बलिया (बिहार) के सांसद सूरजभान ने लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के सांसद भाई रामचंद्र पासवान के साथ संसद भवन में प्रवेश किया। । 25 जून 2008 को बेगूसराय कोर्ट ने मधुरापुरा के एक किसान की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
..और शहाबुद्दीन (राजद )
यह सीवान से सांसद हैं। इन पर 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 8 हत्याओं के साथ अपहरण के आरोप भी हैं। 2007 से उम्र कैद की सजा भुगत रहे हैं।
जी हां ये चेहरे भारतीय राजनीति के अपराधिकरण की सच्चई को बताते है। आजाद भारत की जब नींव रखी जा रही थी तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि भारतीय संसद में एक दिन सजायाप्ता लोग भी शान से प्रवेश करेंगे । कल मनमोहन सिंह की सरकार रहें या जाए लेकिन भारतीय लोकतंत्र ऐसा लगता है अब अपराधियों के हवाले हो गया है ।
तो फिर दोषी कौन है? भारतीय राजनेता और उनकी पार्टी जो इन सांसदो को टिकट देते है या देश का वह मतदाता जो सबकुछ जानते हुए भी इनके पक्ष में मतदान करते है और इन लोंगो को चुनकर संसद के मंदिर में भेज देते हैं ? अपने जबाब हमें लिख भेजें हम आपके जबाबों को ऑन लाइन प्रकाशित करेंगंे :p>