नई दिल्ली.
दुनियाभर में भगवान राम का चित्रणअयोध्या के शासक के रूप में ही किया जाता है, लेकिन रणबांकुरों की धरती राजस्थान के एक मुस्लिम चित्रकार द्वारा सत्रहवीं सदी में निर्मित रामायण के चरित्रों के दुर्लभ चित्र इन दिनों यूरोप में धूम मचा रहे हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह ने अपने शासनकाल (1628 से 1652) के दौरान एक मुस्लिम चित्रकार साहबदीन से एक चित्रमय रामायण तैयार करवाई थी। यह दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी के एशिया विभाग में आज भी मौजूद है।
देखने की होड़ :
इन चित्रों में से करीब 130 को हाल ही में ब्रिटिश लाइब्रेरी ने ‘लव एंड वैलोर इन इंडियाज ग्रेट एपिक - द रामायना’ नाम से प्रकाशित किया है। मेवाड़ शैली में बने राम, सीता, लक्ष्मण समेत अन्य चित्रों को देखने की यूरोपीय लोगों में होड़ मची है।
बेमिसाल :
भारत यात्रा पर आए लंदन के चित्रकार टॉमी फॉस्टर ने कहा कि एक मुस्लिम चित्रकार का हिंदू देवताओं के चित्र इस तरह से तैयार करना अपने आप में बेमिसाल है। इन चित्रों को देखकर लगता है, मानो राम मेवाड़ या आसपास के ही कोई राणा रहे हों। गौरतलब है कि कर्नल टॉड ने अपने इतिहास में लिखा है कि मेवाड़ के राणा अपने आपको राम के पुत्र लव का वंशज मानते हैं।