नई दिल्ली प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह सोमवार को लोकसभा के दो दिनी सत्र की शुरुआत में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया है। सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री ने विश्वास प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ‘ये सदन मंत्रिपरिषद में अपना विश्वास जताता है।’ सत्र की कार्यवाही की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी कर रहें हैं। 14वीं लोकसभा का यह 14वां सत्र विशेष तौर पर विश्वास मत के लिए बुलाया गया है।
बहस के लिए 16 घंटे कस समय
विश्वास प्रस्ताव पर बहस के लिए 16 घंटे कस समय दिया गया है लेकिन अगर जरुरत पड़ी तो यह समय अवधि बढ सकती है ।
क्या कहा प्रधानमंत्री ने
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्वास प्रस्ताव रखते हुए कहा है कि वाम दलों ने सरकार से परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लिया तो वे उस वक्त ग्रुप आठ की बैठक में भाग लेने के लिए गए हुए थे और उनकों उसी दौरान इस बात की जानकारी हुई थी । उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बचा जा सकता है । सरकार अंतराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी से बात कर रहीं थी और अगर यह बातचीत आगे बढ़ती तो वे खुद संसद में आते और इस परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने के लिए सांसदों से दिशा निर्देश लेता कि सरकार इस मसले पर कैसे आगे जाए।
सुरजीत और ज्योति बसु को धन्यावद दिया
मनमोहन सिंह ने अपने संक्षिप्त भाषण में यूपीए सरकार के निर्माण में योगदान देने के लिए ज्योति बसु , करुनानिधि और हरकिसन सिंह सुरजीतसिंह का शुक्रिया भी अदा किया है।
वर्तमान में लोकसभा में प्रभावी संख्या 541 है। दो सांसदों के स्थान खाली पड़े हैं, जबकि एक सांसद को वोटिंग का अधिकार नहीं है। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष पक्ष व विपक्ष में बराबर मत पड़ने की स्थिति में ही वोटिंग कर सकते हैं।
किसने क्या कहा :
लालकृष्ण आडवाणी ने विश्वास प्रस्ताव का विरोध किया है और कहा है कि वे इस सरकार को सदन के भीतर हराना चाहते हैं ।
हम भी चाहते हैं कि भारत परमाणु ताकत बनें और अमेरिका से मजबूत संबंध पर हमें आपत्ति नहीं है। लेकिन परमाणु करार को लेकर प्रधानमंत्री ऐसा व्यवहार कर रहें है , जैसे कि यह दो देशों के बीच न होकर दो लोंगो के बीच हो।
लालकृष्ण आडवाणी, नेता प्रतिपक्ष
करार से ज्यादा बिजली मिलने की बात झूठी है। डील होना यानी अमेरिका की गुलामी स्वीकार करना होगा। सरकार देश से झूठ बोल रही है। यूपीए ने लेफ्ट के साथ धोखा किया है जिसे हम माफ नहीं करेंगे।
मो. सलीम (माकपा)
अधिकांश जनता इस डील के पक्ष में हैं लेकिन जो विरोध हो रहा है उसके पीछे निजी और राजनीतिक कारण हैं। एक व्यक्ति के ईगो को संतुष्ट करने के लिए सरकार गिराने का खेल खेला जा रहा है।
रामगोपाल यादव (सपा)
डील भारत को गुलामी की ओर ले जाएगी। इससे रत्तीभर फायदा होने वाला नहीं है। सरकार जो दावे कर रही है वह केवल कागजी हैं, उसे हकीकत बताना चाहिए। इसे रद्दी की टोकरी में फेंक देना चाहिए।
ब्रजेश पाठक (बसपा)