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जा तेरे सपने बड़े हों, उम्मीदों पर खरे हों

सोनीपत/पटियाला.देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर। यह कहावत बीजिंग ओलंपिक क्वालिफायर जितेंद्र उर्फ जीतू पर सटीक बैठती है। 2007 में सीनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रूस के नंबर वन बॉक्सर को कड़ी टक्कर देकर जितेंद्र ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। हालांकि कड़े मुकाबले में वह मैच हार गया था। हंसमुख स्वभाव का जितेंद्र भिवानी के मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखता है।

सच्चन शर्मा और विद्या देवी के दो बेटों में वह छोटा है। बड़े भाई का नाम सुरेंद्र है। घरवालों को उम्मीद है कि जितेंद्र जरूर कामयाब होगा। जितेंद्र कहता है, ‘मां ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, फिर भी अक्सर फोन पर मेरे खेल के बारे में पूछती रहती हैं। मेरी तैयारी पूरी है और उम्मीद करता हूं कि सबकुछ अच्छा हो।’

अखिल हैं आदर्श :

जितेंद्र बॉक्ंिसग में अखिल को अपना आदर्श मानता है जो पटियाला एनआईएस में उसके रूम पार्टनर भी हैं। जितेंद्र ने कहा,‘अखिल भाई ने शुरू से बहुत मदद की है। जितने भी लड़के बीजिंग जा रहे हैं, उनमें वे सबसे सीनियर हैं। उनके अनुभव का फायदा मुझे मिल रहा है।’ जितेंद्र की तैयारियों से प्रभावित अखिल को भी बीजिंग में उससे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

बदल गया सब कुछ : जितेंद्र बताता है कि बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के बाद बहुत कुछ बदल गया है।

अब लोग पहचानने लगे हैं। कोच कमेंट : बीएस संधू को उम्मीद है कि जितेंद्र एक सरप्राइज के रूप में उभरेगा। वे कहते हैं, ‘यह बहुत एनर्जेटिक और एग्रेसिव लड़का है। बस उम्मीद करें कि मैच वाला दिन उसका हो..।’

जितेंद्र का सफर

>> 2006 कॉमनेवल्थ गेम्स में कांस्य

>> 2006 एशियन गेम्स में प्रतिनिधित्व

>> 2007 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य

>> थाईलैंड मे रजत पदक

>> 2007 में सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व

>> थाईलैंड में वियतनाम को हराकर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई





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