नई दिल्ली. विश्वास मत के लिए अगले हफ्ते होने वाले संसद के दो दिवसीय विशेष सत्र में शामिल होने के लिए जेल में बंद सांसदों ने भी कवायद शुरू कर दी है। एक सांसद को मंगलवार को कोर्ट से इसकी मंजूरी भी मिल गई। उत्तरप्रदेश में इलाहाबाद की एक कोर्ट ने मैनपुरी स्थित जेल में बंद विवादास्पद लोकसभा सांसद अतीक अहमद को विशेष सत्र में शामिल होने की मंजूरी दे दी। वे समाजवादी पार्टी से इस साल जनवरी से निष्कासित हैं।
ये सांसद भी जेल में :
सरकार के पक्ष में वोट डालने जा रही विभिन्न पार्टियों के अफजल अंसारी (सपा), मो. शहाबुद्दीन (राजद), राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (राजद) और सूरजभान सिंह (लोजपा) भी जेल में बंद हैं। सपा सांसद शहाबुद्दीन ने भी पटना हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर विशेष सत्र में शामिल होने की मंजूरी मांगी है।
मायावती की कोशिश : सरकार के विरोध में खड़ी बसपा के सांसद उमाकांत यादव भी फरुखाबाद जेल में हैं। मायावती ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता व लोकनिर्माण मंत्री नसीमुद्दीन को जेल में यादव से मिलने को भेजा। यादव ने भी बसपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए खुद को पार्टी के साथ बताया। छोटे दलों की चुप्पी के बीच अकाली दल विरोध में उतरा
यूपीए सरकार के शक्ति परीक्षण में महज छह दिन शेष रह गए हैं, लेकिन कई छोटे दलों ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। इससे सरकार की स्थिति पर छाया कोहरा अभी छंटा नहीं है। जहां एचडी देवेगौड़ा के जनता दल (एस) ने सरकार का विरोध करने का संकेत दिया है तो नेशनल कॉन्फ्रेंस, झामुमो और एक वोट वाले मिजो नेशनल फ्रंट का रुख साफ नहीं है। इस पृष्ठभूमि में शिरोमणि अकाली दल ने सरकार के खिलाफ मतदान करने की घोषणा कर दी है।
तीन सांसदों वाली जनता दल (एस) के प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने मंगलवार को सरकार का विरोध करने के संकेत दिए। हालांकि उन्होंने 18 जुलाई को अंतिम फैसला लेने की बात कही। देवेगौड़ा ने कहा, ‘कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जद (एस) को बर्बाद करने के पूरे प्रयास किए हैं। हमें उनके हाथों अपमान व प्रताड़ना मिली है।’
उमर अधिकृत : श्रीनगर से मिली खबर के अनुसार दो सांसदों वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विश्वास मत के पक्ष या विपक्ष में मतदान का फैसला लेने के लिए अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को अधिकृत कर दिया है। कोर ग्रुप की हुई बैठक में यह फैसला किया गया।
जेएमएम का फैसला 19 को : यूपीए में शामिल पांच सांसदों वाला झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) 19 जुलाई को फैसला लेगा। माना जा रहा है कि जेएमएम के प्रमुख शिबू सोरेन केंद्रीय मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल नहीं किए जाने से नाखुश हैं।
इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री व आठ सांसदों वाली अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल ने मंगलवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से कहा, ‘कांग्रेस के खिलाफ हमारी नीति एकदम साफ है। अकाली दल के सांसद विश्वास मत के दौरान एनडीए के साथ मिलकर कांग्रेसनीत सरकार के विरोध में वोट देंगे।’ उन्होंने कहा कि करार से उनका कोई विरोध नहीं, लेकिन उनकी पार्टी विश्वास मत पर एनडीए के फैसले पर चलेगी।
बादल ने अपने दल को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के सिख होने भर से उन्हें समर्थन नहीं देगी। बादल ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती को सलाह दी कि राजनीति में दखल न दें। गौरतलब है कि वेदांती ने अकाली सांसदों को प्रधानमंत्री का समर्थन करने की सलाह दी थी।
25 करोड़ के लालच का आरोप समाजवादी पार्टी के बागी सांसद मुनव्वर हसन ने कहा है कि सरकार के पक्ष में मतदान के लिए उन्हें 25 करोड़ रुपए का लालच दिया गया था। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि किसने उन्हें लालच दिया है। दूसरी ओर, सपा के ही सांसद अक्षय प्रताप सिंह ने उन पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाया है।
तब एक वोट से गिरी थी सरकार : अप्रैल 1999 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के तत्कालीन सांसद सैफुद्दीन सोज के महज एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस से निकाले जाने के बाद सोज कांग्रेस में शामिल हो गए थे। आज वे न केवल केंद्रीय मंत्री हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं।