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ठप पड़ा सीधे रसोई गैस योजना का विस्तार

नई दिल्ली.पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) में चल रहे विवाद के कारण सीधे रसोई गैस आपूर्ति का काम ठप पड़ गया है। बोर्ड जहां पहले से गैस वितरण में काम कर रही कंपनियों को मंजूरी लेने पर जोर दे रहा है, वहीं कंपनियां नए सिरे से मंजूरी का विरोध कर रही हैं। दिल्ली समेत देश के कई शहरों में रसोई घरों में सीधे गैस आपूर्ति योजना का विस्तार होना था। इंद्रप्रस्थ गैस, गैल व इंडियन ऑयल समेत कई कंपनियों को पीएनजीआरबी ने कहा है कि उन्हें विस्तार योजनाओं पर पहले मंजूरी लेनी होगी। कंपनियों का कहना है कि पीएनजीआरबी के गठन के पहले से वे इस क्षेत्र में काम कर रही हैं, इसलिए उन्हें नए सिरे से मंजूरी लेने का कोई मतलब नहीं है।

क्या है मामला

पीएनजीआरबी में अध्यक्ष बनाम सदस्यों के बीच चल रहा विवाद 10 जुलाई को सामने आया था। सदस्यों ने अध्यक्ष के रवैये की आलोचना की थी। सदस्यों का आरोप था कि अध्यक्ष मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं और उनकी सहमति के बगैर ही सरकारी कंपनियों की रसोई घरों तक गैस सप्लाई की योजना पर फिर से मंजूरी लेने का आदेश जारी कर दिया गया है।

मंत्रालय का इनकार

इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है क्योंकि बोर्ड पूरी तरह स्वायत्त संस्था है। कंपनियों को कुछ आपत्ति है, तो बोर्ड के फैसले के खिलाफ वे कोर्ट जा सकते हैं। बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि बोर्ड का गठन तो कर दिया है, लेकिन यह ढंग से काम नहीं कर पा रहा है।

क्या है समस्या:

1. बोर्ड के अध्यक्ष व सचिव मंत्रालय को कई बार लिख चुके हैं कि बोर्ड में अधिकारियों और कर्मचारियों का अभाव है। 2. बोर्ड के गठन के लिए जारी अध्यादेश में यह स्पष्ट है कि पेट्रोलियम व नेचुरल गैस के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अब बोर्ड के नियमों से संचालित होंगी। सरकारी कंपनियां इस प्रावधान को मानने को तैयार नहीं है।

कहां होगा रसोई गैस योजना का विस्तार

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार 2010 तक देश के 15 शहरों में रसोई घरों में सीधे गैस आपूर्ति की योजना बनाई गई है। इस योजना के लिए गैल, इंडियन ऑयल समेत कई कंपनियों ने अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ मिलकर नई कंपनियां बनाई हैं। योजना के मुताबिक इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, चंडीगढ़, जालंधर, लुधियाना, पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्व दिल्ली, कोलकाता, आसनसोल, रांची और धनबाद में कुल 22 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।





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