नई दिल्ली. वामदलों के समर्थन वापसी के बाद से यूपीए सरकार पर छाई राजनीतिक अनिश्चितता के चलते केंद्र के तमाम प्रशासनिक कार्य ठप पड़ गए हैं। नतीजतन कैबिनेट मंजूरी की बाट जोह रहे अनेक नीतिगत मुद्दे अधर में लटके हुए हैं। उधर, मंत्रालयों के अधिकारी भी 22 जुलाई को विश्वास मत का परिणाम आने तक ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाए हुए हैं।
आठ जुलाई के बाद से केंद्रीय मंत्रिमंडल की मात्र एक या दो बैठकें हुई हैं, मगर इनमें भी किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा नहीं की गई। नार्थ ब्लॉक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालयों के अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार के बचने की संभावनाओं पर अटकलें लगा रहे हैं और अधिकतर मंत्रालयों ने स्वयं को नियमित कामकाज तक सीमित कर लिया है। वित्त मंत्रालय नार्थ ब्लॉक में ही स्थित है।
सुरक्षा संबंधी अनेक जरूरी बैठकें भी अधर में लटकी हुई हैं। वैसे तो प्रधानमंत्री ने नक्सली हिंसा से निपटने को शीर्ष वरीयता दी है, मगर कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में इस हफ्ते प्रस्तावित एक बैठक पर अनिश्चितता बरकरार है।
इन मुद्दों पर फैसले का इंतजार :
>> सीबीआई के डायरेक्टर विजय शंकर 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। मगर उनकी जगह नए डायरेक्टर की नियुक्ति के बारे में भी कैबिनेट ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है। हालांकि सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर की अध्यक्षता में गृह व कार्मिक सचिवों की एक उच्चस्तरीय समिति चार संभावित नामों की सूची कैबिनेट के विचारार्थ पहले ही पेश कर चुकी है।
>> सैन्य अधिकारियों के वेतन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए रक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हुआ है। वहीं, सेना में ब्रिगेडियर से ऊपर के पदों की संख्या बढ़ाने संबंधी एवी सिंह समिति की सिफारिशों पर भी कैबिनेट ने अभी तक विचार नहीं किया है। कैबिनेट सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि ये सिफारिशें पिछले कुछ हफ्तों से लंबित हैं।
>> भविष्य में देश कर्ी ईधन जरूरतों के संबंध में बायो-फ्यूल नीति से जुड़ा एक और अहम नीतिगत फैसला अटका हुआ है।