नई दिल्ली.
लोकसभा का अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए अपनी पार्टी में बढ़ते दबाव के बीच माकपा के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी ने साफ कह दिया है कि वे अपने पद पर 22 जुलाई तक बने रहना चाहते हैं। इसी दिन यूपीए सरकार संसद में बहुमत साबित करेगी। सोमनाथ की इस घोषणा को वामपंथियों के बीच मतभेदों की अटकलों की पुष्टि करने वाला माना जा रहा है। चटर्जी ने ये विचार पार्टी महासचिव प्रकाश करात को लिखे पत्र में जताए और कहा कि वे विपक्षी भाजपा के साथ सरकार के खिलाफ वोट डालने के पक्ष में नहीं हैं।
यह बात और है कि माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने सोमनाथ द्वारा उन्हें चिट्ठी लिखने संबंधी मीडिया रिपोर्टो को खारिज करते हुए कहा, ‘हम चिट्ठियां नहीं लिखते। सोमनाथ चटर्जी इस मामले में अपना निर्णय खुद करेंगे।’
गलती मानी:
एक टीवी चैनल से बातचीत में माकपा नेता सीताराम येचुरी ने माना कि समर्थन वापस लेने के सिलसिले में राष्ट्रपति को सौंपी गई माकपा सांसदों की सूची में चटर्जी का नाम शामिल होना गलती है। यह नाम तारांकित करते हुए रखा जाना चाहिए था, जो नहीं हुआ। ऐसा वेबसाइट से माकपा सांसदों की सूची डाउनलोड करने के कारण हुआ।
मेल-मुलाकातों का सिलसिला:
इस बीच, सपा नेता अमर सिंह अपनी पार्टी के दो और नेताओं के साथ चटर्जी से मिले और उनसे अपना पद नहीं छोड़ने का आग्रह किया। कोलकाता से मिली खबर के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने माकपा के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु से मुलाकात की। समझा जाता है उन्होंने यह मुलाकात चटर्जी को पद छोड़ने के लिए मनाने की नई कोशिशों के तहत की है।
कांग्रेस के प्रहार:
कांग्रेस ने राष्ट्रपति के पास भेजी गई समर्थन वापस लेने वाले वामपंथी सांसदों की सूची में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का नाम जोड़े जाने की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव व मीडिया प्रभारी वीरप्पा मोइली ने कहा कि यह ज्यादती है।