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सरकार पर माफी की आफत

जयपुर.मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार की किरकिरी हो गई। राज्यपाल के सुझाव और आपत्तियों की जानकारी दिए बगैर राजस्थान विश्वविद्यालय के अस्थायी शिक्षकों का आमेलन अध्यादेश जैसे ही शिक्षामंत्री ने सदन की मेज पर रखा, कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ने कांग्रेस के एतराज को जायज ठहराते हुए सरकार से गलती के लिए माफी मांगने को कहा। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुबह 11:45 बजे आधा घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

सरकार यह अध्यादेश दुबारा लाई है। पहले पारित इसी विधेयक को राज्यपाल अपने सुझाव व आपत्तियों के साथ लौटा चुके हैं। कांग्रेस के सदस्यों का कहना था कि विधेयक वापस होने के कारणों की जानकारी विधानसभा अध्यक्ष और सदन को क्यों नहीं दी गई। विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ने कहा, यह अध्यादेश नहीं निकलना चाहिए था। राज्यपाल की आपत्ति या सुझाव पहले सदन में आने चाहिए थे। सरकार इस गलती के लिए क्षमा मांगे।

संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने केवल इतना कहा कि आसन का आदेश शिरोधार्य है। इससे कांग्रेसी संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने वैल में पहुंचकर जमकर हंगामा किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधि एवं न्याय मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि अध्यादेश नियमों के तहत ही पेश किया गया है। इसमें कहीं किसी तरह की चूक नहीं हुई है। फिर भी आसन से व्यवस्था दी गई है, इसलिए सरकार आगे ध्यान रखेगी कि सदन की परंपराओं का उल्लंघन न हो। इस पर कांग्रेस के सदस्य स्पष्ट रूप से खेद व्यक्त करने की मांग पर अड़ गए। काफी शोर-शराबे के बाद अध्यक्ष सुमित्रासिंह ने ही कहा कि मैं आसन की ओर से कह रही हूं, यह पुनरावृत्ति अब नहीं होगी। गलत परंपराएं नहीं बनेंगी। विपक्ष इससे भी संतुष्ट नहीं हुआ और वैल में नारेबाजी जारी रही। शोर-शराबे के बीच ही विधायी कार्य हुए।

हंगामे की शुरुआत

शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ ने अध्यादेश रखा तो कांग्रेस के हरिमोहन शर्मा ने एतराज किया कि ऐसा ही एक विधेयक पहले इसी सदन ने पारित किया था। उसका क्या हुआ? राज्यपाल ने क्या कहकर लौटाया है, पहले वे कारण सदन को बताए जाने चाहिए थे। उसके बाद ही सरकार अध्यादेश ला सकती थी।

यह अध्यादेश असंवैधानिक है, इसलिए इसे यहां नहीं रखा जाए। कांग्रेस के सी.पी.जोशी ने भी पाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत यह मुद्दा उठाया। प्रश्नकाल स्थगित करने पर एतराज

सदन की बैठक शुरू होते ही संयम लोढ़ा ने सदस्यों के अधिकारों के संरक्षण का मामला उठाते हुए कहा कि सरकार पहले ही धारा 131 के तहत उठाए गए सवालों का जवाब नहीं देती है और आज प्रश्नकाल भी नहीं हुआ है। पूर्व में शोकाभिव्यक्ति से पहले प्रश्नकाल होते रहे हैं। आसन ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक जुबेर खान ने शोकाभिव्यक्ति से पहले विधायी कार्य करने पर आपत्ति जताई।

शोर-शराबे के बीच श्रद्धांजलि

विधानसभा में सोमवार को फील्ड मार्शल सैम मानेकशा, विधायक रामलाल, मूलचंद मीणा, बेनाराम गहलोत, प्रसिद्ध गांधीवादी समाज सेविका निर्मला देशपांडे और जयपुर बम धमाकों के मृतकों को सदन में शोर-शराबे के बीच श्रद्धांजलि दी गई। शोक प्रस्ताव पढ़ने के दौरान वैल में नारेबाजी कर रहे कांग्रेस सदस्य तो वहीं चुपचाप बैठ गए, लेकिन गुर्जर आंदोलन में मारे गए निदरेष लोगों को श्रद्धांजलि देने की मांग पर विधायक प्रहलाद गुंजल, अतरसिंह भडाना और सुरेन्द्रसिंह राठौड़ बोलते रहे।





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