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महीना हुआ नहीं, चार फीट के रह गए बाबा

जम्मू.अमरनाथ यात्रा शुरू हुए महीना भी पूरा नहीं हुआ कि इस बीच सियायी गर्मी, हिंसक प्रदर्शनों और तेजी से बदले घटनाक्रम के असर से बाबा बर्फानी चार फीट के आसपास ही रह गए हैं। माना जा रहा है कि यात्रा पूरी होने तक शायद ही हिम शिवलिंग देखने को मिले। पिछले माह 18 तारीख को यात्रा शुरू होने के समय शिवलिंग 12 फीट ऊंचा था। एक माह में बाबा बर्फानी के दर्शन करने वालों की संख्या पांच लाख तक पहुंच गई है। यात्रा शुरू होने के दस दिन बाद ही हिमलिंग आधा रह गया था।

इस बार तगड़े इंतजाम : इस बार हिम लिंग से छेड़छाड़ नहीं हुई। गुफा में श्राइन बोर्ड ने हिमलिंग को बचाने के उपाय किए थे। इस बार जेनरेटर गुफा से दूर लगा है। बाबा बर्फानी को कोई हाथ न लगा सके इसके लिए लोहे की ग्रिलें लगाई गई हैं। हिंसक प्रदर्शन थमने के बाद एक बार फिर यात्रियों की संख्या बढ़ गई है जिसके चलते अमरनाथ गुफा के आसपास गर्मी लौट आई है नतीजा बाबा बर्फानी अंतध्र्यान होने लगे हैं। पिछले साल आधिकारिक यात्रा शुरू होने से पहले ही बाबा बर्फानी पिघल गए थे। इससे यात्रा पर असर पड़ा था।

महज एक महीने ही यात्री आए और बाद में यात्रा बस नाममात्र की ही रह गई थी। भीड़ के चलते रुकी थी यात्रा इस बार महीने भर में ही श्रद्धालुओं की संख्या का रिकॉर्ड बन गया है। श्राइन बोर्ड के सीईओ ने कहा है कि गुफा के बाहर राजस्थान से लाए कृत्रिम शिवलिंग को स्थापित नहीं किया जाएगा। सीईओ के मुताबिक यह मामला अदालत में विचाराधीन है लिहाजा इसकी स्थापना नहीं हो सकती।

बोर्ड के पास है कृत्रिम शिवलिंग : उदयपुर स्थित बाबा भोलेनाथ सेवा समिति ने बोर्ड की अनुमति से 800 किलो वजनी संगमरमर का शिवलिंग बनाया था। 18 जून को यह शिवलिंग उदयपुर से श्रीनगर पहुंचा था, यहां इसे बोर्ड को सौंपा गया था।

12 जुलाई के लिए थी तैयारी :

उस समय कहा गया कि तारा उदय होने पर 12 जुलाई को शिवलिंग स्थापित होगा। इस बीच एक याचिका के आधार पर प्रदेश हाइकोर्ट ने कृत्रिम शिवलिंग स्थापित करने पर बोर्ड को नोटिस दे दिया और सात दिनों में जवाब मांगा है।

हर रोज 40 हजार श्रद्धालु

हिमलिंग के तेजी से पिघलने की एक वजह यह भी थी कि हर रोज करीब 40 हजार यात्री दर्शनों के लिए पवित्र गुफा तक पहुंच रहे थे जिससे गुफा में गर्मी बढ़ गई। इसके बाद श्राइन बोर्ड को बालटाल में दी 40 हैक्टेयर जमीन के मसले पर पहले कश्मीर और फिर जम्मू में हिंसात्मक प्रदर्शन हुए, जिनके असर से यात्रियों की संख्या अचानक घट गई।





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