नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर इस बात के लिए सफाई मांगी है कि आखिर संज्ञेय किस्म के अपराधों में प्राथमिकी दर्ज करने के कोर्ट के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
जस्टिस बीएन अग्रवाल और जीएस सिंघवी की बेंच ने यह सवाल उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद से अपहृत 16 वर्षीय एक किशोरी की मां ललिता कुमारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया। किशोरी का अभी तक पता नहीं लग सका है।
पुलिस की धमकी : याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बावजूद लोनी थाने के प्रभारी ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय याचिकाकर्ता को धमकी दी थी कि यदि वह अपहर्ता के खिलाफ दायर की गई अपनी शिकायत वापस नहीं लेती हैं तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
चिंता की बात : लोनी थाना प्रभारी के इस रवैए के बारे में जानने के बाद जजों ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘पीड़ित महिला की मदद करने और उसे सुरक्षा देने की बजाय पुलिस आरोपी का बचाव कर रही है। कोर्ट ने कहा कि यह हालत चिंताजनक है।’
अवहेलना क्यों : कोर्ट ने इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय समेत देश के सभी राज्यों के डीजीपी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है कि संज्ञेय अपराधों के एफआईआर दर्ज करने संबंधी उसके निर्देशों की अवहेलना क्यों की जा रही है।
वेबसाइट पर भी : इस निर्देश को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि देश के समस्त पुलिस विभागों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
विस्तृत रिपोर्ट तलब : सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।