जयपुर. गुर्जर, बंजारा, रेबारी, गाड़िया लुहार और गरीब सवर्ण जातियों के लिए लाए जा रहे आरक्षण विधेयक को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।
यह काम सकरुलेशन के जरिए किया गया। हालांकि इससे पहले ही कैबिनेट की बैठक में इस तरह का विधेयक लाए जाने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी गई थी। इसके अलावा कैबिनेट ने पूर्व विधायकों के भत्तों में बढ़ोत्तरी करने संबंधी विधेयक भी मंजूर कर लिया।
अन्य पिछड़ा वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग को पदोन्नतियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इस वर्ग में क्रीमीलेयर को भी आरक्षण से वंचित करने की व्यवस्था की गई है। अनुसूचित जाति, तथा अनुसूचित जनजाति को ही पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इस विधेयक में अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी के मौजूदा आरक्षण और अन्य सुविधाओं को बरकरार रखते हुए विशेष पिछड़ा वर्ग के लिए 5 प्रतिशत तथा सवर्ण वर्ग को आर्थिक आधार पर 14 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। राजस्थान में अब कुल आरक्षण 49 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत हो जाएगा।
आरक्षण विधेयक क्यों?
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अनुसार 1981 में राज्य सरकार ने बंजारों और गाड़िया लुहारों के अत्यधिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें जनजाति में शामिल करने की केन्द्र को सिफारिश की थी।
इसी तरह एक उच्चधिकार प्राप्त समिति ने गुर्जरों के अत्यधिक सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को देखते हुए विशेष उपाय करने की सिफारिश की थी।
राईका (रेबारी/देवासी) भी घुमंतू जीवनचर्या के कारण सामाजिक और शैक्षणिक दोनों रूप से अत्यधिक पिछड़े हुए हैं। इन चारों जातियों के लिए विशेष पिछड़े वर्ग के रूप में वर्गीकृत करना जरूरी हो जाता है। अनारक्षित वर्ग के गरीबतम वर्गो के लिए भी एक आयोग ने आरक्षण का लाभ इन व्यक्तियों के लिए भी लागू करने की सिफारिश की है।
ओबीसी के मुद्दे पर विधेयक मौन
राजस्थान युवा गुर्जर महासभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विक्रम गुर्जर ने आरोप लगाया है कि विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल गुर्जर जाति को यह विधेयक लागू होने के बाद केन्द्रीय सेवाओं में ओबीसी का लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार यहां गुर्जरों को ओबीसी से बाहर करने की बात कर रही है। इसी तरह पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकाय संस्थाओं में आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।