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सरकार विरोधी संघर्ष तेज, माया का साथ मिला

नई दिल्ली.भारत-अमेरिका असैन्य एटमी करार को रोकने के लिए कटिबद्ध वामदलों ने जहां संसद के समीकरण के लिए मायावती से समर्थन मांगा है वहीं, सरकार की कथित ‘वादा खिलाफी’ और परमाणु करार के प्रति उसके ‘जुनून’ के विरोध में वे सोमवार से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं।

माकपा महासचिव प्रकाश करात ने सरकार को उखाड़ फेंकने के मकसद से बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात कर उनका समर्थन मांगा। मायावती से यहां उनके निवास पर लगभग 45 मिनट की बैठक के बाद करात ने कहा कि वामदल और बसपा करार विरोधी संघर्ष में एक दूसरे का साथ देंगे। 22 जुलाई को संसद में होने वाले विश्वास मत की ओर अप्रत्यक्ष इशारा करते हुए करात ने कहा, ‘हम सरकार के खिलाफ दोनों पार्टियों के बीच सहयोग चाहते थे।’

दोनों पार्टियों ने लोकसभा में सरकार की पराजय सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इस बीच, जनमत जगाने के लिए चारों वामदल-माकपा, भाकपा, आरएसपी व फारवर्ड ब्लॉक सोमवार को नई दिल्ली में देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेंगे।

इस दौरान वे जनता को बताएंगे कि उन्होंने सरकार से समर्थन वापस क्यों लिया और वे परमाणु करार के खिलाफ क्यों हैं। सोमवार को प्रमुख वाम नेता यहां एक सभा को संबोधित करेंगे। इसमें वे मूल्यवृद्धि व महंगाई समेत यूपीए की तमाम असफलताओं व खामियों को भी उजागर करेंगे।

हम ‘सहयात्री’ नहीं चुन सकते : संसद में विश्वास मत के दौरान ‘सांप्रदायिक’ भाजपा के साथ सरकार के खिलाफ मतदान करने के निर्णय पर वामदलों की हो रही आलोचना को माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने खारिज किया है।

उन्होंने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा, ‘आप जब ट्रेन में यात्रा करते हैं, तब अपने सहयात्री का चुनाव नहीं कर सकते। हम क्या कर सकते हैं? हमें तो अपने गंतव्य तक पहुंचना है और हमारा मकसद परमाणु करार का विरोध करना है।’

चुनाव बाद फिर समर्थन : हालांकि येचुरी ने यह भी कहा कि यदि अगले चुनाव के बाद कांग्रेसनीत सरकार सत्ता में आई और अगर वह न्यूनतम साझा कार्यक्रम का ‘बिना धोखा’ दिए पालन करती है तो वामदल उसे फिर से समर्थन दे सकते हैं।

वर्जन : ‘बहुमत जुटाने के लिए यूपीए गठबंधन खरीद-फरोख्त में लगा है। सीबीआई एक राजनीतिक हथियार बन गई है। उसका इस्तेमाल तथाकथित जांचों को शुरू करने और बंद करने के लिए किया जा रहा ।’- एबी बर्धन, महासचिव, भाकपा ।





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