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इंजीनियरिंग अप डॉक्टरी डाउन

भोपाल.भोपाल स्थित भेल के जवाहरलाल नेहरू स्कूल में इस साल ११ वीं में सात विद्यार्थियों ने बॉयोलॉजी विषय चुना। रतलाम के माणक चौक हायर सेकंडरी स्कूल क्रमांक-१ की 11वीं की बॉयोलॉजी कक्षा मात्र ९ विद्यार्थियों की है। ग्वालियर के सबसे बड़े स्कूल गोरखी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बॉयोलॉजी (११वीं) में अब तक 20 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया।

बॉयोलॉजी से विद्यार्थियों का मोहभंग होने के ये तो चंद उदाहरण हैं। प्रदेशभर के हायर सेकंडरी स्कूलों में यही स्थिति है। डॉक्टर बनने की सीढ़ी के पहले पायदान (११वीं में बॉयोलॉजी) की यह हालत भविष्य में खड़ी होने वाली समस्या का संकेत मात्र है, जिसको लेकर शिक्षा जगत भी चिंतित है। शिक्षा व्यवस्था ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि आने वाले सालों में डॉक्टरों का वैसा ही टोटा पड़ सकता है जैसा किसी समय अमेरिका में था। पीएमटी में बैठने वाले विद्यार्थियों की घटती संख्या इसी ओर इशारा कर रही है।

कुछ साल पहले तक बॉयोलॉजी को लेकर इतनी मारामारी रहती थी कि विद्यार्थियों को यह विषय चाहकर भी नहीं मिल पाता था। अब हालात एकदम उलट हैं। बॉयोलॉजी के विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं। कुछ स्कूल तो अपने यहां इस विषय की पढ़ाई बंद करने के बारे में ही सोचने लगे हैं।

भोपाल के कार्मल कान्वेंट रतनपुर में इस साल बॉयोलाजी (कक्षा ११वीं ) में मात्र ४ विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया जबकि पिछले साल इनकी संख्या दोगुना थी। स्कूल की पीजीटी डॉ.बबिता जैन कहती हैं स्थिति वाकई गंभीर है। विद्यार्थियों का रूझान इंजीनियरिंग के कारण गणित की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है। सीबीएसई से संबद्ध भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल में इस साल कक्षा ११वीं की बॉयोलाजी में एक ही आवेदन आया तो प्राचार्य ने विद्यार्थी को दूसरे स्कूल में दाखिला लेने को कह दिया।

इधर माध्यमिक शिक्षा मंडल के पास प्रदेश में बायोलॉजी के विद्यार्थियों की संख्या का आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन बोर्ड के सचिव डी.डी.अग्रवाल मानते हैं कि विद्यार्थियों के सामने अब कई विकल्प खुल गए हैं। हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ.एन.पी.मिश्रा के अनुसार डॉक्टरी पेशे के प्रति अब पहले जैसा आकर्षण नहीं रहा है। डॉक्टरों के प्रति जनता का जो रुख है, उससे भी असर पड़ रहा है।

जानकारों ने कहा, कहां से आएंगे डॉक्टर:

प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के तथ्य के बीच बॉयलॉजी विषय की यह स्थिति चिंता बढ़ा रही है। एनजीओ जनस्वास्थ्य अभियान के डॉ.अजय खरे के अनुसार प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के १८७२ पद खाली हैं। यदि विद्यार्थी बॉयोलॉजी से ही नफरत करने लगेंगे तो भविष्य में डॉक्टर कहां से आएंगे, यह बड़ा सवाल है। भोपाल के एक्सटॉल कॉलेज के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ.शाश्वती भट्टाचार्य के अनुसार बॉयोलॉजी में संभावनाएं ज्यादा होने के बावजूद इस विषय के प्रति घटता रूझान चिंताजनक है। दो-तीन वर्ष में स्थिति ज्यादा खराब हुई है।

पीएमटी में भी घट रहे हैं विद्यार्थी

मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाले प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में भी शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। इस साल ३५ हजार विद्यार्थी बैठे जबकि पिछले साल इनकी संख्या ३७ हजार ५७७ थी। पीएमटी में इतनी संख्या होने की वजह भी ड्रापआउट विद्यार्थी हैं, जो १२वीं पास करने के बाद सिर्फ पीएमटी की तैयारी में ही जुटे रहे। दूसरी तरफ इस साल पीईटी में बैठने वाले विद्यार्थियों की संख्या एक लाख २१ हजार थी।

ये हैं वजह >>12 वीं उत्तीर्ण करने की उम्र 17-18 साल मानी जाती है। पीएमटी देने के बाद साढ़े चार साल एमबीबीएस और एक साल इंटर्नशिप का लगता है। पीजी के बाद कम से कम तीन-चार साल अपनी जगह बनाने में लग जाती है। इस तरह हर पायदान समय पर पार करने के बावजूद 28 से 30 साल के बाद रिटर्न मिलता है, दूसरी तरफ 12वीं के बाद पीईटी देकर चार साल में बीई या बीटेक होने के बाद अच्छा ऑफर मिल जाता है।

>>पीएमटी में प्रतिस्पर्धा अधिक है जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं।

>> इंजीनियरिंग की बनिस्बत डॉक्टरी की पढ़ाई ज्यादा महंगी।

>> बॉयोलॉजी से जुड़े दूसरे विषयों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने से इसे सीमित संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता है जबकि इंजीनियरिंग में कई विकल्प हैं।





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