भोपाल.राज्य सरकार पूरे प्रदेश में फसल आधारित बीमा की जगह मौसम आधारित बीमा योजना लागू करने की तैयारी कर रही है। रबी के बाद खरीफ सीजन में प्रयोग के तौर पर पायलट प्रोजेक्ट में टीकमगढ़, खरगोन, इंदौर और सतना जिलों की चुनी हुई तहसीलों को शामिल किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे अच्छे रहे, तो अगले साल प्रदेश में फसल आधारित बीमा योजना खत्म कर मौसम आधारित बीमा योजना लागू करने का निर्णय लिया जाएगा।
बीमा का काम आईसीआईसीआई लोंबार्ड को दिया गया है। निजी क्षेत्र की यह कंपनी सामाजिक न्याय विभाग की गरीबों के समूह बीमा की योजना में सरकार की कसौटी पर खरी नहीं उतरी थी। ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो प्रदेश के 51 हजार गांवों में बसे किसानों के लिए फसल बीमा का लाभ मिलने में लंबे इंतजार के झंझट से मुक्ति मिलने की उम्मीद बंध सकती है।
रबी सीजन में गेहूं, सरसों और चना की फसलों को नई योजना में शामिल करने के बाद अब खरीफ सीजन में कपास,सोयाबीन और धान की फसलों को लिया गया है। कर्जदार और गैर कर्जदार दोनों तरह के किसानों को सोयबीन,धान की असिंचित और कपास फसलों के लिए टीकमगढ़, जिले की टीकमगढ़ तहसील, सतना जिले की रामपुर बघेलान और खरगौन जिले की खरगौन तहसील में यह बीमा योजना बतौर प्रयोग शुरू की गई है। इसका बीमा एवं उसके क्लेम का भुगतान एग्रीकल्चरल इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को सौंपा गया है।
केवल गैर कर्जदार किसानों के लिए कपास व सोयाबीन फसलों के लिए खरगौन जिले की महेश्वर तथा इंदौर जिले की महू तहसील में यह योजना लागू की गई है, जिसकेबीमा और क्लेम के भुगतान की जवाबदारी आईसीआईसीआई लोंबार्ड कंपनी को दी गई है।
कर्जदार किसानों को भी लाभ
राज्य मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक जिलों में कर्जदार किसानों को राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना उपलब्ध नहीं होगी, लेकिन नई योजना लेना उनके लिए अनिवार्य होगा। गैर कर्जदार किसानों के लिए फसल बीमा या मौसम आधारित बीमा योजना में से कोई एक लेने का विकल्प होगा। नई योजना में कृषक को प्रीमियम का एक भाग देना होगा। दूसरा भाग केन्द्र व राज्य सरकार के ५क्-५क् प्रतिशत के अनुदान से दिया जाएगा। पिछले रबी सीजन की पायलट योजना में एग्रीकल्चरल बीमा कंपनी को बतौर प्रीमियम डेढ़ करोड़ रुपए दिए गए थे। कृषि महकमे के सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार यह भुगतान सामान्य बीमा योजना के बजट से करती है तथा इस समय इस बजट में ३५ करोड़ रुपए उपलब्ध हैं।
क्या फर्क है दोनों योजनाओं में मौसम आधारित बीमा योजना में वर्षा के हिसाब से क्लेम का भुगतान होता है तथा यह भुगतान तुरंत होता है, जबकि फसल बीमा योजना में फसल के पकने का इंतजार किया जाता है और क्लेम के भुगतान में समय लगता है।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना को बतौर पायलट प्रोजेक्ट लागू किया गया है, यदि यह सफल रहा तो अगले वर्ष पूरे प्रदेश में यह योजना लागू की जाएगी।
- एसके उपाध्याय, उपसचिव कृषि विभाग