भोपाल. भोपालवासियों के लिए यह ‘थोड़ी खुशी, थोड़ा गम’ जैसी स्थिति है। सुकून की बात यह है कि यहां की जलवायु देश के कई बड़े शहरों से बेहतर है, वहीं चिंता का कारण यह है कि शहर में धीरे-धीरे गरमी बढ़ रही है। एक अध्ययन के अनुसार पिछले 50 साल में भोपाल के तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है, हालांकि यह वैश्विक परिदृश्य से कम है।
बाहरी लोगों को भोपाल का मौसम सुहाता है, खासकर दिल्ली जैसे महानगरों से जब लोग यहां आते हैं तो ‘न ज्यादा गरमी, न ज्यादा ठंड’ की स्थिति उन्हें सुकून देती है। सामान्य तौर पर भोपाल में गरमी के दिन न तो बड़वानी, खजुराहो जैसे रहते हैं न दिल्ली, जयपुर जैसी ठंडी रातें। एक बहुराष्ट्रीय बैंक में कार्यरत दिल्ली के अमित सिंह कहते हैं यहां नहाने के लिए कभी गरम पानी की जरूरत नहीं हुई जबकि दिल्ली में ठंड के दिनों में इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।
आदर्श मौसम के मायने
जानकारों के अनुसार आदर्श मौसम के मायने सभी जगह अलग-अलग होते हैं। संबंधित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के ऊपर भी निर्भर रहता है कि वे किस तरह मौसम को सहन कर सकते हैं। फिर भी वह मौसम आइडियल माना जाता है जहां न ज्यादा ठंड रहे, न ज्यादा गरमी हो। जयप्रकाश अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश श्रीवास्तव के अनुसार अधिकतम तापमान २५ से ३२ के बीच हो तथा न्यूनतम ५ डिग्री से नीचे न जाए, तो मौसम आदर्श माना जा सकता है।
दूसरे शहरों में ये स्थिति
दिल्ली, आगरा, इंदौर, ग्वालियर में मई में अधिकतम औसत तापमान 40 से ४२ डिग्री से. के बीच रहता है। वहीं ठंड में जनवरी में इन शहरों में न्यूनतम तापमान ७ से ९ डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। बैंगलुरु जहां का मौसम आदर्श माना जाता है वहां अप्रैल-मई में अधिकतम औसत तापमान ३६-३७ डिग्री रहता है। मुंबई में यह ३८ डिग्री सेल्सियस रहता है।
बारिश : कहर के कुछ उदाहरण
भोपाल में बारिश के जानलेवा रूप धारण करने के कुछ उदाहरणों को छोड़ दिया जाए तो यहां न तो कभी बारिश ने ज्यादा कहर बरपाया और न प्यासा रखा। अगस्त 06 में हुए वर्षाजनित हादसे में अधिक नुकसान की वजह मानवीय गलतियां भी थीं। मानसून की सामान्य औसत बारिश 1086.6 मिमी तथा साल की सामान्य औसत बारिश 1260.2 मिमी है।
गरमी : अपनी सीमा में
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में मई की तपन कम पड़ रही है। 10 सालों में मई का अधिकतम औसत तापमान ४३.५ से घटकर 40.4 तक पहुंच गया है। 2001 से 07 तक यह 40 डिग्री से. के आसपास रहा। मई व जून का अधिकतम औसत तापमान 40 डिग्री के आसपास रहता है। आद्र्रता २५ फीसदी के आसपास रहने से भीषण गरमी का अहसास नहीं होता।
ठंड : ज्यादा नहीं लुढ़कता पारा
यहां जनवरी का न्यूनतम औसत तापमान 10 से ११ डिग्री के आसपास रहता है, जबकि अधिकतम २५ के। १९९८ से 2008 के दौरान सबसे ठंडी रात जनवरी 01 में रही, जब पारा ४.१ डिग्री को छू गया था। फरवरी में पारा न्यूनतम 10 से १२ और अधिकतम 30 डिग्री तक पहुंच जाता है। 10 सालों में फरवरी 04 में न्यूनतम तापमान ५.४ रहा जो सबसे कम था।
गरम हो रहा है भोपाल
जलवायु परिवर्तन का असर दुनियाभर पर पड़ रहा है। एक ताजे अध्ययन के अनुसार भोपाल के तापमान में 50 साल में 0.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस दौरान अधिकतम व न्यूनतम तापमान के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष सामने आया है।
मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. डीपी दुबे के अनुसार तापमान में बढ़ोतरी तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए, पर जिस तरह की स्थितियां हैं उसमें यह संभव नहीं। एशिया के तापमान में 100 साल में १ डिग्री की वृद्धि हुई है। इसकी तुलना में भोपाल की स्थिति ठीक है। अमेरिका स्थित अंतरिक्ष संस्था नासा गोडार्ड इंस्टीटच्यूट ऑफ स्पेस स्टडीज के अनुसार 1950 में धरती का तापमान १३.८ डिग्री से. था जो १९९९ में बढ़कर १४.५ डिग्री से. हो गया।
मौसम का विज्ञान
भोपाल समुद्र की सतह से ५२३ मी. की ऊंचाई व भू-मध्य रेखा से २३.१७ डिग्री अक्षांश पर स्थित है। वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र सतह से एक से डेढ़ किमी की ऊंचाई वाले स्थानों का तापमान कम रहता है, इसीलिए पहाड़ी क्षेत्र आमतौर पर ठंडे रहते हैं। हरियाली, मिट्टी, पहाड़ आदि उस क्षेत्र की जलवायु को निर्धारित करते हैं। भोपाल के ३क् फीसदी इलाके में हरियाली है और झीलों के कारण सतही जल की उपलब्धता भी काफी है। इससे यहां का तापमान नियंत्रित रहता है।