नई दिल्ली. तेल की कीमतों के साथ बढ़ते किराए के कारण हवाई यात्रियों ने फटाफट पहुंचने की चाहत को ताक पर रखकर बड़ी तादाद में रेलवे की ओर रुख किया है।
कच्चे तेल में भारी मूल्यवृद्धि और लगातार ऊंची होती मुद्रास्फीति दर के कारण हांफती रेलवे को अपेक्षाकृत ‘भारी जेब’ वाले यात्रियों की वापसी से ऑक्सीजन मिली है। पिछले कुछ समय तक रेल यात्रियों की संख्या पांच फीसदी की औसत दर से बढ़ रही थी, लेकिन पिछले चार माह में यह दर लगभग 11 फीसदी तक पहुंची है। माना जा रहा है कि बड़े महानगरों को छोड़ दें तो भोपाल, इंदौर, रायपुर, जयपुर, अमृतसर जैसे शहरों के लिए सस्ती हवाई यात्रा दूर की कौड़ी ही है।
मौका भुनाने की कोशिश : रेलवे स्टेशनों पर ‘प्रीमियम पैसेंजरों’ की संख्या बढ़ने के कारण कुछ रेलमार्गो पर प्रीमियम ट्रेनों (राजधानी, शताब्दी समेत अन्य सुपरफास्ट) की संख्या बढ़ाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। ‘भास्कर’ से बातचीत में रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के स्पेशल ड्यूटी आफिसर (ओएसडी) सुधीर कुमार ने कहा कि पिछले तीन महीने में रेलवे की विकास दर 26 फीसदी तक पहुंच गई है। इसमें यात्रियों की भागीदारी अप्रत्याशित रूप से छह फीसदी बढ़ी है।
एसी कोचों की संख्या बढ़ाने पर विचार : रेलवे को यात्री ट्रेनों में सबसे ज्यादा कमाई एसी श्रेणी से होती है। हवाई सफर करने वाले ज्यादातर यात्री एसी श्रेणी में ही सफर करना पसंद करते हैं, इसीलिए एसी कोचों की संख्या बढ़ाए जाने पर विचार चल रहा है।
कुमार ने बताया कि पिछले चार सालों में एसी फस्र्ट क्लास का किराया 28 फीसदी, एसी टू का 22 फीसदी और गरीब रथ का किराया 45 फीसदी तक घटाए जाने के बावजूद रेलवे ने रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है। कुमार के अनुसार, प्रत्येक श्रेणी के कोचों की बढ़ती मांग को देखते हुए कोच फैक्टरी को तीन हजार कोच बनाए जाने का आदेश दिया गया है।