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जयपुर धमाकों के दोषी दो माह बाद भी गिरफ्तार नहीं

जयपुर.ठीक दो महीने पहले आज ही की तारीख को शाम सवा सात बजे शुरू हुए धमाकों ने जयपुर को दहला दिया था। वो गूंजें आज भी उन घरों में सुनी जा सकती हैं, जिनके चिरागों को वे धमाके हमेशा के लिए बुझा गए। वे सात धमाके जो 68 जिन्दगियों को लील गए। वे महिलाएं जो अपने बेटे, अपने पति को खो चुकी हैं, अब इंसाफ मांग रही हैं। कातिलों को पकड़ने का इंसाफ।

बारिश की बूंदों से खून के धब्बे भले ही धुल गए हों, लेकिन जज्बातों का जो कत्ले-आम 13 मई को हुआ था, उससे दिलों पर लगे घाव अब तक हरे हैं। आतंकवाद की चपेट में आए लोगों के परिजनों के बहते आंसुओं ने उनके चेहरों का रंग छीन लिया है। .. लेकिन उनकी आंखों ने एक रंग बचा रखा है। वह है- गहरा लाल। आक्रोश की आग में लावे की तरह जलती लाल आंखों में बस एक ही सवाल है। क्या सरकार आसमान से गिर रहे ओलों को गिन रही है। अपनों से जुदा करने वाले दो महीने से कैसे बेखौफ घूम रहे हैं?

गली-मोड़ और चौराहों पर लगे वे 6 स्क्रेच आक्रोश की इसी ज्वाला में जलकर खाक हो रहे हैं। हवाओं संग उड़ती कागजों की राख पूछती है? क्या, यही हमारे गुनहगार थे? या कोई और।

यह सवाल इसलिए भी बिजली की तरह कड़कते हैं, क्योंकि पुलिस जांच की दिशा अब तक तय नहीं हो सकी। शक की सुई हवाओं की रुत की तरह बांग्लादेशियों पर भी ठहरी, लेकिन यह केवल कूड़े-कचरे को ही उठा सकी, जो फिर आ जमा। दो महीने में बादल भी बार-बार कहने को जर्बदस्त ढंग से गरजे। जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को सौंपी गई, लेकिन जयपुर को जख्म देने वालों का कोई सुराग नहीं लग सका।

इस बीच प्रदेश में आंदोलन की काली व धूलभरी आंधियों ने जख्मों की दिशा और दशा को ही बदल दिया। जयपुर ने भले ही जीना सिख लिया, लेकिन आक्रोश की वजह से हर जयपुरवासी की भौहें तन गई हैं। झक-झोरने वाले सवालों की पूरी श्रृंखला हैं, जो आक्रोश को बाढ़ में बदल सकती है।

झूठे वादे अभिशाप बन गए

सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर में रुद्राभिषेक के दौरान बम धमाके में मारे गए पंडित ताराचंद शर्मा की पत्नी राजेश्वरी ने सरकार द्वारा किए गए वादों को नाटक करार दिया है। उन्होंने कहा कि दोषियों का न पकड़ा जाना पूरे शहर के लिए नासूर है और झूठे वादे उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा अभिशाप।

तब किए गए आर्थिक व अन्य प्रकार की सहायता के वादे अभी तक भी पूरे नहीं हुए हैं। समाज में अपना प्रभाव दिखाने के लिए मीडिया के माध्यम से तब उन्हें घर पर मदद के तरह-तरह के आश्वासन दिए गए। लेकिन दिन गुजरने के बाद सभी लोग मुंह मोड़कर चले गए। बाद में किसी ने भी वापस आकर हाल नहीं पूछा। उस मनहूस घड़ी को कोसते हुए राजेश्वरी ने कहा किवे सहायता के झूंठे वादे उनके परिवार के लिए अभिशाप बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि दो माह बाद भी डेयरी बूथ का आवंटन, नौकरी, पेशन सहित अन्य सहायता राशि अभी तक मुहैया नहीं करवाई गई। आतंकियों को नहीं पकड़े जाने को लेकर ताराचंद की मां भगवती देवी ने कहा कि सरकार उनको पकड़े या छोड़े, इससे मेरा बेटा तो वापस नहीं आ जाएगा। बुजुर्ग मां ने पुलिस के खुफिया तंत्र पर अविश्वास जताते हुए कहा कि पुलिस ऐसी ही ढीली पड़ी रही तो आतंककारी तो एक बार फिर से जयपुर में ऐसा हादसा करेंगे।

आंसू ठहरे, गुस्सा अटल

राधेश्याम यादव की बुजुर्ग मां गोविंदी कभी दुख से फफकने लगती है तो कभी गुस्से में चिल्लाती हैं। वह उन जिम्मेदार लोगों को कोसती हैं जो दो महीने बीत जाने पर भी आतंकवादियों का सुराग नहीं पा सके हैं। उनके गालों पर बेटे को खोने का गम आंसुओं के रूप में ठहर गया है और आंखों में गुस्सा अटल है।

अपनों के जाने का गम

11 साल के शुभम की मौत का मंजर उसकी मां कांता देवी को रह-रहकर गुस्सा दिलाता है। वे कहती हैं- जाने वाले चले गए, लेकिन सरकार अब भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। नेताओं के परिवार का कोई सदस्य बम हादसे में मारा जाता तो उन्हें पता चलता कि अपनों के जाने का गम क्या होता है।

मुझे कुछ नहीं पता : कटारिया

भास्कर : जयपुर विस्फोटों की जांच में क्या प्रगति हुई है?

गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया: जांच चल रही है।

दो माह में जांच टीमों ने कुछ तो किया होगा?

-जो भी सूचनाएं मिली होंगी, जांच टीम उन्हें परख रही हैं।

बम विस्फोटों की जांच में उपलब्धि के तौर पर सरकार के पास बताने लायक कुछ है या नहीं?-अभी मैं रास्ते में गाड़ी में हूं। टेलीफोन पर एकदम जानकारी नहीं दे सकता। वैसे भी अभी इस संबंध में मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है, जिसे मैं आपको बता सकूं।

मैंने पद छोड़ दिया : वीएस सिंह

पूर्व प्रमुख गृह सचिव वी.एस.सिंह ने कहा है कि मैं पद छोड़ चुका हूं। बम विस्फोटों के बारे में अब मुझे कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी पद छोड़ने के बाद इस बारे में कुछ भी बोलना उचित नहीं है। बेहतर होगा आप इस बारे में मौजूदा प्रमुख गृह सचिव से ही बात करें।

मैंने अभी ज्वॉइन किया है : थानवी

प्रमुख गृह सचिव एसएन थानवी ने कहा कि मैंने हाल ही कार्यभार संभाला है। विस्फोटों की अभी जांच चल रही है। सरकार और पुलिस अभियुक्तों को पकड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही है। जब तक कोई ठोस नतीजा निकलकर सामने नहीं आता, तब तक कुछ कहना संभव नहीं है।





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