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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. बुजुर्गो की बीमारी माना जाने वाला मोतियाबिंद (कैटरेक्ट), नन्हे-मुन्नों में तेजी से फैल रहा है। देश में प्रतिवर्ष 40 हजार से भी ज्यादा बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। अकेले पीजीआई चंडीगढ़ में प्रतिमाह इससे पीड़ित करीब 40 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं।
पीजीआई के नेत्र चिकित्सक डॉ. जगतराम के मुताबिक, इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं करवाने पर बच्च आंखों की रोशनी खो सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में अंधेपन का शिकार होने वाले लोगों में से लगभग 80 प्रतिशत का संबंध विकासशील देशों से है। इनमें से 15 फीसदी मामलों की वजह मोतियाबिंद है।
मोतियाबिंद के कारण
>> गर्भावस्था के तीन माह तक महिला को इंट्रायूट्राइन संक्रमण होना।
>> वंशानुगत समस्या।
>> आंख में चोट लगना।
लक्षण
>> बच्चे की आंख के ठीक मध्य में सफेद सा निशान।
>> आसपास पड़ी वस्तुएं पकड़ न पाना।
>> रोशनी की ओर देखने से बचना।
>> पहचानने और चलने-फिरने में दिक्कत।
बचाव:
>> गर्भावस्था के पहले तीन माह तक डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। कई बार ये दवाएं ही संक्रमण का कारण बनती हैं।
>> बच्चों की नियमित जांच कराएं।
>> आंखों को हर प्रकार की चोट से बचाएं।