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शहर भर में शहनाई की धूम

भोपाल. marriage विवाह मुहूर्त खत्म होने के एक दिन पहले भड़ली नवमी पर शुक्रवार को समूचा शहर शादी घर में तब्दील हो गया। गुप्त नवरात्र की इस नवमी पर शहर और समीपस्थ क्षेत्रों में करीब एक हजार से अधिक विवाह होने का अनुमान है।

गो-धूलि बेला से ही सड़कों पर बैंड-बाजों के बीच बाराती नाचते हुए दिखाई दे रहे थे। अनेक मार्गो पर एक साथ कई बारातों के इकट्ठा हो जाने से रास्ते तक जाम हो गए थे। गत आठ जुलाई से विवाह मुहूर्त शुरू हुए थे। केवल पांच दिन ही मुहूर्त होने से पहले ही दिन से विवाह समारोह की धूम है। इन मुहूर्त में शुक्रवार को भड़ली नवमी पर सर्वाधिक विवाह हुए।

पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि भड़ली नवमी तृतीया और देव उठनी ग्यारस के मुहूर्त की तरह ही खासा महत्व रखती है। इस तिथि पर बगैर मुहूर्त निकलवाए विवाह कराए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भड़ली नवमी पर शहर और समीपस्थ क्षेत्रों मे करीब एक हजार से अधिक विवाह होने का अनुमान है।

इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस तिथि पर शहर में एक-एक पंडित को दो से तीन विवाह तक संपन्न कराना पड़े। कई लोगों को पास के गांवों से पंडितों को बुलवाना पड़ा। पं. भंवरलाल शर्मा के मुताबिक शहर में विवाह के निमंत्रण पत्र बंटे हैं, उनमें सबसे अधिक नवमी तिथि के ही हैं।

खचाखच थे शादी हाल
शहर के अधिकांश शादी हाल धर्मशालाएं और कई बड़ी होटलें बारातियों व घरातियों से खचाखच भरी थीं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर भी बारातियों के हुजूम दिखे।

अब विवाह नवंबर में
शनिवार को विवाह का अंतिम मुहूर्त है। इसके बाद विवाह नवंबर माह में देवउठनी ग्यारस के बाद शुरू होंगे। उल्लेखनीय है कि इस पूरे साल विवाह मुहूर्त का जमकर टोटा रहा। गत मई और जून में शुक्र व गुरु तारा अस्त रहने से विवाह नहीं हुए। अब 13 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने से विवाह नहीं होंगे।

बारिश से हुई परेशानी
रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद शादी के काम में जुटे लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। कई शादी घरों में बीती रात पानी भर जाने के कारण सामान भीगने से लोगों को नुकसान भी हुआ। सजावट पर भी पानी फिर गया।

बाजारों में भीड़
बाजारों में भी दिनभर भीड़ रही। सब्जी मंडी में रोज की अपेक्षा शुक्रवार को सुबह दस बजे तक भारी भीड़ दिखाई दी। विवाह समारोह के लिए अनेक लोग लोडिंग आटो, जीप व कारों में सब्जियों को भरकर ले जाते दिखे। बैंड-बाजे, घोड़ी और लाइट वाले एक बारात लगाने के तत्काल बाद दूसरी बारात निकलवाने दौड़ लगाते रहे। यही हाल पंडितों का भी था।





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