इंदौर.
आईआईटी (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) इंदौर में प्रवेश 2009 से होने लगेंगे। शुरुआत होगी देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के आईईटी (इंस्ट्टियूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) के भवन की पहली और दूसरी मंजिल से।
आईआईटी इंदौर का परिसर चुनने के लिए शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एडीशनल सेक्रेटरी अशोक ठाकुर, आईआईटी कानपुर के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष नीलाकाश एस व्यास, आईआईआईटी (इंडियन इंस्ट्टियूट ऑफ इंफरमेशन टेक्नॉलाजी एंड मेनेजमेंट) जबलपुर के डायरेक्टर संजीव भार्गव ने आईईटी के साथ गारमेंट पार्क, परदेशीपुरा का भी दौरा किया।
एक दिन पहले ही दी सूचना
दल ने दौरे की सूचना एक दिन पहले ही कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव को दी। कलेक्टर के मुताबिक सूचना मिलते ही हमने गारमेंट पार्क के साथ आईईटी का नाम सुझाया। देर रात कुलपति डॉ. भागीरथ प्रसाद से चर्चा कर दल को यूनिवर्सिटी लाने की बात कही, जिस पर उन्होंने तत्काल सहमति दे दी।
शहर की सौगात के लिए हम जगह देंगे
कुलपति ने बताया आईआईटी शहर के लिए सौगात है। इसके खुलने से कई छात्रों को फायदा होगा। इसके लिए हम यूनिवर्सिटी परिसर में भवन उपलब्ध कराएंगे।
आईआईएम की शुरुआत भी ऐसे ही हुई थी
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर की शुरुआत भी पिछले दशक में इसी तरह महिला पोलीटेक्निक, राजेंद्रनगर के परिसर से हुई थी। करीब दो वर्ष तक वहीं कक्षाएं लगी और होस्टल का उपयोग भी किया। उसके बाद आईआईएम का परिसर तैयार हुआ।
गारमेंट पार्क भी देखा
दल ने सुबह साढ़े ग्यारह बजे गारमेंट पार्क, परदेशीपुरा का मुआयना किया। अपर कलेक्टर रेणु पंत और एसडीएम चंद्रमौलि शुक्ल भी उनके साथ थे। फिर तक्षशिला (खंडवा रोड) परिसर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज भवन पहुंचे।