सूरत.
डायमंड सिटी सूरत के अश्विनी कुमार रोड क्षेत्र में एक ऐसा अनोखा व ऐतिहासिक वट वृक्ष है, जिस पर चौथा पत्ता नहीं आता। इस पेड़ पर हमेशा सिर्फ तीन पत्ते ही रहते हैं। नए पत्ते के आते ही पहले के तीन में से एक पत्ता सूख कर गिर जाता है। यह सिलसिला कई दशकों से चला आ रहा है।
इसके समीप स्थित शिव मंदिर के महंत बलराम दास ने बताया कि वृक्ष एवं इस पवित्र स्थल से संबंधित साहित्य उपलब्ध था, जो वर्ष 1968 में सूरत में आई बाढ़ में बह गया। इस तीन पत्ती वट के नाम पर शहर के संबंधित इलाके का नाम ही ‘तीन पत्ती वट’ पड़ गया है। लोक मान्यताओं के अनुसार यह वह स्थान है, जहां भगवान कृष्ण ने दानवीर कर्ण का अंतिम संस्कार किया था।
भगवान ने कर्ण को वचन दिया था कि वे हमेशा इस भूमि पर दर्शन देते रहेंगे। तभी से इस वृक्ष पर तीन पत्ते ही आते हैं। इन्हें ब्रrा, विष्णु एवं महेश का स्वरूप माना जाता है।