जम्मू. अमरनाथ श्राइन बोर्ड संभवत: देश का एकमात्र ऐसा धनी बोर्ड है, जिसके नाम पर एक इंच भी जमीन नहीं है। जमीन आवंटन विवाद के बाद बोर्ड अध्यक्ष राज्यपाल एनएन वोहरा ने यात्रा के इंतजाम का दायित्व भी सरकार को सौंप दिया है। ऐसे में अब बोर्ड के पास पूजा-अर्चना का ही काम बचा है।
अमरनाथ यात्रा के लिए हर साल लाखों लोग कश्मीर आते हैं और हजारों परिवार इसी यात्रा पर पलते हैं। सरकार के खजाने में भी करोड़ों रुपए जाते हैं। इस साल अब तक करीब साढ़े चार लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर लिए हैं।
एक भवन, वह भी सरकार का :
अमरनाथ की यात्रा जिन दुर्गम रास्तों से होती है या जहां पर बाबा बर्फानी की गुफा है, वहां तो साल के अधिकांश समय बर्फ ही होती है। लिहाजा वहां बोर्ड के पास जमीन न होना कोई मायने नहीं रखता। हालांकि ऐसे कई स्थान हैं, जहां श्राइन बोर्ड अपना कुछ आधारभूत ढांचा तैयार कर सकता है। तीर्थयात्रियों के लिए सरकार ने एक भवन बनाया है, लेकिन उस पर श्राइन बोर्ड का अधिकार नहीं है।
एक्ट के तहत कार्य :
बोर्ड संबंधी एक्ट के मुताबिक बोर्ड का काम है यात्रा का प्रबंध, यात्रियों के लिए भवन निर्माण और उनके लिए विभिन्न सुविधाएं जुटाना। साथ ही पूजा-अर्चना आदि का प्रबंध देखना। गौरतलब है कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड 2000 में बनाया गया था। राज्यपाल इसका अध्यक्ष होता है। बोर्ड में अन्य सदस्य भी होते हैं। श्राइन बोर्ड की अपनी वेबसाइट भी है।