इंदौर.
सात लोगों की जान ले चुके इंदौर के दंगों पर चढ़ा सियासत का रंग अब अलग स्वरूप में गहराने लगा है। दंगों की आड़ में बेगुनाह लोगों को फंसाने की जहां हर स्तर पर जमकर मुखालफत हो रही है वहीं जबरन केस दर्ज करवाने तथा विरोधियों को उलझाने की कवायद दिन ब दिन तेज होती जा रही है।
गुरुवार को दंगा पीड़ितों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एसपी आर.के.चौधरी से मिलने पहुंचे शहर कांग्रेस नेताओं ने साफ शब्दों में कहा दंगाई चाहे कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाए। जो लोग दंगा रोकने में पुलिस के मददगार थे, उन्हें ही यदि दंगों में उलझाया जाएगा तो फिर कोई भी संकट की घड़ी में पुलिस की मदद के लिए आगे नहीं आएगा।
इधर, खजराना में हुई चार मौतों के मामले में पाटीदार समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमों के विरोध में सरकार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान करते हुए कहा यदि दर्ज केस वापस नहीं लिए गए तो वे शहर सीमा की नाकेबंदी कर दूध व सब्जियों की सप्लाय रोक देंगे। धर्म रक्षा समिति के बैनर तले छत्रीपुरा थाने का घेराव करने पहुंचे लोगों ने उदापुरा में खेमचंद माखीजा की मौत के साथ ही रविदासपुरा सहित अन्य इलाकों में हुई घटनाओं में लिप्त लोगों के खिलाफ नामदज प्रकरण दर्ज करने की मांग की।
शहर में हुए उपद्रव के बाद खजराना क्षेत्र में हंगामे और पाटीदार समाज के लोगों पर केस दर्ज करने के विरोध में जिला पाटीदार समाज ने गुरुवार को एसपी ऑफिस पर धरना दिया। दो घंटे के प्रदर्शन के बाद एसपी को ज्ञापन भी सौंपा गया। इससे पहले समाजजनों को संबोधित करते हुए चेतावनी भी दी गई कि यदि मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो इंदौर में न सब्जी आएगी और न दूध।
दोपहर 11.30 बजे जिलेभर के किसान रीगल तिराहे पर इकट्ठा हुए। बरसते पानी में प्रदर्शन के दौरान छाते ही छाते नजर आ रहे थे। नारेबाजी के साथ पदाधिकारियों ने समाज के लोगों को खजराना का घटनाक्रम भी बताया।
अध्यक्ष श्यामलाल पाटीदार के नेतृत्व में एसपी आर.के. चौधरी को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें बताया गया हिंदू व मुस्लिम नायता समाज के संबंध कई साल से मैत्रीपूर्ण रहे हैं। कुछ सिमी आतंकियों ने इस क्षेत्र में सक्रिय होकर इस भाईचारे में जहर घोल दिया है। तीन जुलाई को हुई घटना भी इसी तरह की है। पथराव एवं गोलीबारी में मारे गए युवकों का दोष निर्दोषों पर मढ़ दिया गया। षड्यंत्रपूर्वक खजराना मस्जिद से पीपल चौक तक रहने वाले हिंदू परिवारों को घर खाली करने के लिए विवश किया जा रहा है।
समाज ने ज्ञापन में मांग की कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन सचिव भेरूलाल पाटीदार ने बताया इस मौके पर प्रांतीय अध्यक्ष दीनदयाल पाटीदार, आईपीसी बैंक अध्यक्ष कैलाश पाटीदार, विधायक महेंद्र हार्डिया, भाजपा महामंत्री उमेश शर्मा, श्रीराम पाटीदार, पूर्व जिला आबकारी अधिकारी रामेश्वर पाटीदार, खेमचंद पाटीदार एवं नरेंद्र पाटीदार सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे।
प्रांतीय अध्यक्ष श्री पाटीदार ने बताया अलग-अलग तरह से समाज के 16 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किया गया है जबकि समाज ने कभी भी न कोई हिंसा की न हथियार चलाए। यदि जल्द ही केस वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन की व्यापक रूपरेखा बनाई जाएगी और शहर में दूध, सब्जी की आपूर्ति रोक दी जाएगी। इसके अलावा समाज की महापंचायत बुलाकर भी इस मसले पर रणनीति तैयार होगी। आभार मनोज सूले ने माना।
‘थाना घेरने वालों को डंडे मारें’
उपद्रव की आग में झुलसा शहर धीरे-धीरे शांत हो रहा है। अब राजनीतिक संगठन निदरेषों पर मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बना रहे हैं। समय आ गया है जब थाना घेरने वालों को डंडे मारकर भगाना पड़ेगा। जो वाकई गुनाहगार हैं, वे किसी भी संगठन या समुदाय के हों कड़ी कार्रवाई होना चाहिए।
ये बातें शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन के साथ एसपी आर.के. चौधरी से मिलने पहुंचे खजराना के रहवासियों ने कही। श्री टंडन ने कहा राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष होने के बाद भी मैं कहता हूं उपद्रवियों पर मुकदमों को लेकर राजनीति हो रही है। किसी भी पार्टी से जुड़ा कोई नेता थाने जाकर उपद्रवियों की लिस्ट दे रहा है। कुछ लोग तो शपथपत्र देने को तैयार बैठे हैं। कोई यहां बैठे-बैठे मुख्यमंत्री के दंगे में लिप्त होने का शपथ पत्र दे दे तो उसका क्या औचित्य? पुलिस को विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई करना चाहिए। वीडियो फुटेज तथा तस्वीरों को सबूत मानना चाहिए।
अयाज गुड्डू ने कहा सीएसपी बिट्टू सहगल के कहने पर मैंने युवाओं को दंगे में शामिल होने से रोका। अब मुझ पर और परिवार पर ही मामला दर्ज कराने की साजिश हो रही है। उदापुरा में मारे गए खेमराज माखीजा के बंगाली चौराहा निवासी मित्र के बयान पर पार्षद अयाज बेग तथा अन्य को आरोपी बनाने का दबाव बनाया जा रहा है। प्रवक्ता मंजूर बेग ने एक ही पार्टी के हथियारबंद लोगों की तस्वीरें एसपी को दीं। अंत में एसपी ने कहा प्रशासन पूरी जांच के बाद ही कदम उठाएगा।
पीपल चौक या रिंगरोड पर चौकी बनवाएं
इकबाल खान ने कहा उपद्रव की शुरुआत खजराना रिंगरोड पर लोगों को नाम पूछकर पीटे जाने के बाद हुई थी। एक नामी डॉक्टर भी इसके शिकार हुए जिन्हें एक प्रधान आरक्षक ने बमुश्किल बचाया। रिंगरोड तथा पीपल चौक पर हमेशा मामूली विवाद तूल पकड़ लेता है इसलिए स्थायी पुलिस चौकी बनाएं।