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तीन करोड़ गए, नहीं बने स्मार्ट कार्ड

जयपुर. केरोसिन की ज्यादा कीमत लेकर उपभोक्ताओं से वसूले तीन करोड़ रुपए खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्मार्ट कार्ड के नाम पर राजकॉम्प को दे दिए, पर न तो कार्ड बने और न ही पैसा लौटकर विभाग में आया।

इस राशि का उपयोग करने के लिए विभाग ने स्मार्ट कार्ड योजना को ही निरस्त कर दिया। अब विभाग गेहूं और केरोसिन का डायवर्जन रोकने के लिए जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) बनवा रहा है, जबकि विभागीय अफसरों ने इस सिस्टम को भी फिलहाल अनुपयोगी ठहरा दिया है।

उपभोक्ता संगठनों ने उपभोक्ता कल्याण कोष के पैसे से स्मार्ट कार्ड और राशनकार्ड छपवाने का विरोध भी किया था, लेकिन विभागीय अफसरों ने इसके बावजूद सूचना व प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग को यह राशि जारी कर दी।

आईटी विभाग ने अपने निदेशालय के माध्यम से स्मार्ट कार्ड जारी करने का कार्यक्रम बनाया था। यह कार्ड मल्टीपरपज बनाया जाना था। इसमें उपभोक्ताओं की पारिवारिक सूचनाओं के साथ-साथ राशन की दुकान पर बंटने वाली खाद्य सामग्री का भी विवरण दर्ज किया जाना था।

कहां शुरू होना था प्रोजेक्ट
स्मार्ट कार्ड का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए विभाग ने टोंक और झालावाड़ जिले चुनकर दोनों जिलों के राशनकार्डो को स्मार्ट कार्ड में बदला जाना था। यह प्रयोग सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाना था।

क्या है जीपीएस
आईटी निदेशालय ने हाल ही एक निजी मोबाइल सर्विस प्रदाता कंपनी से जीपीएस बनवाया है। इसका उद्देश्य थोक डीलर से खाद्य सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों पर नजर रखना है। इससे पता चल सकेगा कि कौन सा वाहन कब रवाना हुआ और कब गंतव्य स्थल पर पहुंचा। इसमें अधिकारियों की आशंका यह है कि यदि वाहन चालक बीच रास्ते में कहीं खाना खाने रुकता है तो उसे चैक करने की क्या व्यवस्था होगी। दूसरा मत यह भी है कि विभाग में जब पर्याप्त मात्रा में स्टाफ है तो इस सिस्टम की जरूरत ही क्या है?

अब अधिकारी छत्तीसगढ़ पैटर्न पर यह सिस्टम बनाने की बात कर रहे हैं।

पैसे तो दिए थे, लेकिन हुआ क्या, पता करेंगे :
यह तो मुझे याद है कि कुछ समय पहले राजकॉम्प को विभाग की ओर से तीन करोड़ रुपए स्मार्ट कार्ड के लिए दिए गए थे। उसके बाद इन रुपयों और स्मार्ट कार्ड का क्या हुआ। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। मैने हाल ही में विभाग के प्रमुख सचिव का कार्यभार संभाला है। अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही कुछ जानकारी देना संभव होगा।
- परविंदरसिंह पंवार, प्रमुख शासन सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग





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