जयपुर. राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य गाहे-बगाहे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए कभी कैबिनेट बैठक का बहिष्कार करते हैं तो कभी मुख्यमंत्री और भाजपा आलाकमान की उपस्थिति में हुए कार्यक्रमों में ही नहीं गए। जब-जब सत्ता-संगठन का विवाद हुआ हो या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मतभेद।
मंत्रियों ने बैठकों में नहीं जाने के हर बार कई ऐसे कारण बताए, जो नायाब कहे जा सकते हैं। बुधवार को भी मंत्रिमंडल की बैठक में चार मंत्री नहीं आए और उन्होंने इसके पीछे कई रोचक कारण गिनाए। भास्कर ने जाना कि पिछले कुछ सालों में आए ऐसे चुनिंदा मौके जब मंत्री बैठकों अथवा कार्यक्रमों में जानबूझकर नहीं गए और न जाने के रोचक कारण गिनाए।
15 अगस्त,06 राज्यपाल का स्वल्पाहार कार्यक्रम : राज्यस्तरीय समारोह उदयपुर में हुआ था। जयपुर में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की थी। शाम को तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटील की ओर से राजभवन में स्वल्पाहार दिया गया। मुख्यमंत्री समेत सरकार के अधिकांश मंत्री राज्यपाल के स्वल्पाहार कार्यक्रम में नहीं गए।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बरसात के कारण हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाना बताया। जबकि गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया दोपहर में उदयपुर गए थे। तत्कालीन सिंचाई राज्यमंत्री चुन्नीलाल धाकड़ ने थकान होना बताया जबकि उससे पहले वे कई कार्यक्रमों में शरीक हुए थे।
कोटा में 26 जनवरी, 07 को कैबिनेट मीटिंग : कोटा में 26 जनवरी, 2007 को हुई कैबिनेट की मीटिंग में 6 मंत्री गैरहाजिर रहे। बैठक में नहीं जाने का कारण तो रतनजोत और करंज की खेती के नाम पर बड़ी कंपनियों को 11000 करोड़ की जमीनें 900 करोड़ में ही देने का विरोध था।
महिला एवं बाल विकास मंत्री कनकमल कटारा ने कहा , तबीयत ठीक नहीं थी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि मां की तबीयत खराब थी। जबकि दोनों ही मंत्री उससे पहले और बाद में कुछ कार्यक्रमों में शरीक हुए थे। पूर्व खाद्य मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा दौसा कलेक्ट्रेट में अफसरों से चर्चा कर रहे थे। गुलाबचंद कटारिया चित्तौड़गढ़ में दिखे।
भाजपा विधायक दल की बैठक, 21 मार्च, 2007 : विधानसभा सत्र के दौरान बुलाई गई विधायक दल की बैठक में सरकारी मुख्य सचेतक महावीर जैन और तीन मंत्री नहीं आए। पूछे जाने पर दिलावर ने कहा कि मेरा प्रश्न लगा हुआ था, मुझे तैयारी करनी थी, जबकि दिलावर सदन शुरू होने से काफी पहले अपने कक्ष में मौजूद थे।
तत्कालीन शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने कहा ,नवरात्र के कारण पूजा-पाठ में ज्यादा समय लगता है, इसलिए बैठक में नहीं जा सका, जबकि वे सदन शुरू होने से पहले विधानसभा पहुंच गए थे।
कृषि मंत्री प्रभूलाल सैनी ने कहा कि मैं हाउस में आने में ही लेट हो गया था, इसलिए बैठक में नही आ सका। सरकारी मुख्य सचेतक महावीर जैन ने कहा कि पारिवारिक कारणों से निवाई में होने के कारण बैठक में नहीं जा सका जबकि सदन में विधायकों की उपस्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य सचेतक की ही है।
जोधपुर में 14 अगस्त, 2007 की केबिनेट बैठक : जोधपुर में 14 अगस्त, 2007 को हुई केबिनेट की बैठक में पांच मंत्री फिर नहीं पहुंचे। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया उस समय विदेश में थे। तत्कालीन खाद्य मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने खुद को बीमार बताया, जबकि वे अपने क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में नजर आए।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मदन दिलावर ने मां की तबीयत खराब होना बताया, लेकिन क्षेत्र के अन्य कार्यक्रमों में गए। तत्कालीन उद्योग मंत्री नरपतसिंह राजवी निजी कार्य से कहीं और गए हुए थे। असंतुष्ट खेमे की नाराजगी का मामला दिल्ली तक पहुंचा। समन्वय समिति बनाई।
सांवलियाजी में प्रदेश कार्य समिति की बैठक 26 अक्टूबर, 2007 : सांवलिया जी में 26 अक्टूबर, 2007 को हुई प्रदेश कार्य समिति की बैठक में 8 मंत्री, 19 सांसद, 49 विधायक नहीं आए। इससे पहले असंतुष्ट खेमे के लोगों ने बैठक में नहीं जाने का ऐलान किया था। इनमें गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, तत्कालीन शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, तत्कालीन उद्योग मंत्री नरपतसिंह राजवी, महिला एवं बाल विकास मंत्री कनकमल कटारा, तत्कालीन खाद्य मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मदन दिलावर, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, सरकारी मुख्य सचेतक महावीर जैन भी शामिल थे।
कटारिया तो पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी के बुलाने पर भी नहीं गए। पूछे जाने पर दिलावर ने कहा कि बैठक में नहीं जाने के कई कारण हैं। सांसद ललित किशोर चतुर्वेदी ने कहा- मैं मुंबई जा रहा हूं। कारण हाईकमान को बताएंगे। तिवाड़ी ने कहा कि घमंडी नेता गलतफहमी में हैं। तत्कालीन उद्योग मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह ने कहा कि असंतुष्ट मंत्री चेलेंज करके नहीं आए हैं। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
गृहमंत्री कटारिया ने तो साफ-साफ शब्दों में स्वीकार भी किया कि न उनके पेट में दर्द था और न ही वे दूसरे कामों में व्यस्त थे। वे जानबूझकर सांवलियाजी नहीं गए। चूंकि उन्हें जाना ही नहीं था, इसलिए वे उदयपुर में पार्टी नेता आडवाणी से भी नहीं मिले।