भोपाल.
लोकायुक्त जस्टिस रिपुसूदन दयाल के खिलाफ जांच का आदेश देने वाले भोपाल के न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार सिंह को उच्च न्यायालय ने जमकर फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में न्यायाधीश श्री सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।
इस आदेश में न्यायाधीश श्री सिंह के फैसले की कड़ी निंदा भी की गई है। अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने लिखा है कि न्यायाधीश श्री सिंह ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए दुर्भावनावश और शिकायतकर्ताओं की मिलीभगत से यह आदेश जारी किया था। वे अपने कर्तव्यों के पालन में असफल साबित हुए हैं और उनकी निष्ठा भी संदेह के घेरे में है।
प्रथम दृष्ट्या वे मप्र सिविल सेवा नियम 1965 के उल्लंघन के दोषी हैं और उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए और उनके द्वारा दिए गए आदेश की न्यायिक समीक्षा भी की जानी चाहिए। उधर, हाईकोर्ट के न्यायाधीश राकेश सक्सेना ने मुख्य न्यायधीश एके पटनायक के निर्देश पर न्यायाधीश डीके सिंह द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ स्व प्रेरणा से आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दर्ज करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस पर सुनवाई के लिए 21 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में तारीख तय करने को कहा है।
क्या था मामला
जिला अदालत के प्रथम श्रेणी न्यायिक दण्डाधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह ने 19 जून को लोकायुक्त जस्टिस रिपुसूदन दयाल के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत के संबंध में विवेचना कर कोहेफिजा पुलिस को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। आलोक सिघंई ने लोकायुक्त द्वारा रिवेरा टाउनशिप में खरीदे गए मकान के स्वामित्व के संबंध में दस्तावेजों में हेराफेरी कर धोखाधड़ी करने के मामले में लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल उनकी पत्नी श्रीमती उषा दयाल के खिलाफ मामला पेश किया था।
परिवाद पत्र में उल्लेख था कि 20 नवंबर 03 को गृह निर्माण मंडल के डुप्लेक्स कार्नर भवन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस आवेदन पर मंडल ने 24 जनवरी 04 को लाटरी सिस्टम से रिवेरा टाउनशिप में 76 नंबर का प्लाट आवंटित किया था। आवंटन के बाद श्रीमती दयाल के आवेदन पर भवन क्रमांक 60 आवंटित कर दिया गया।
इस मामले में आवेदकों का कहना है कि प्लाट आवंटन को लेकर लीज डीड की शर्र्तो का पालन न करते हुए स्वयं को लाभ अर्जित कर शासन को आर्थिक हानि पहुंचाई गई। अदालत ने इस मामले में कोहेफिजा पुलिस को जांच के आदेश दिए थे। पुलिस जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई जाने से मामला खत्म हो गया। किंतु लोकायुक्त ने सारे मामले की गंभीरता और जिस तरह से भोपाल कोर्ट ने आदेश दिया था, उसे लेकर मुख्य न्यायाधीश को शिकायत की थी और कहा था कि न्यायाधीश सिंह ने उनके खिलाफ शिकायतकर्ता के साथ मिलीभगत कर निर्णय दिया था।