नई दिल्ली.
एक टीवी चैनल की खबर में दावा किया गया है कि पूरे 55 दिन बाद देश की सबसे बड़ी डबल मर्डर मिस्ट्री का सच सामने आ गया है। जी हां आरुषि तलवार और हेमराज के मर्डर से जुड़ा राज अब राज नहीं रहा है और सीबीआई को वारदात की रात का सच पता चल गया है।
आरुषि तलवार का कत्ल राजकुमार, विजय मंडल,कृष्णा में से किसी एक ने किया है। चैनल का दावा है कि यह बात उसे सीबीआई के सूत्रों से पता चली है।गौरतलब है कि सीबीआई ने राजकुमार का नारको एनालिसिस टेस्ट कराया है। और ऐसा ही टेस्ट पूर्व में डॉ. राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा का भी करा चुकी है। सीबीआई इस वारदात की विवेचना इनहीं प्रमुख वैज्ञानिक जाचों के आधार पर ही कर रहीं है।
डॉ. राजेश तलवार बेकसूर है
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार डॉ. राजेश तलवार ने आरुषि तलवार और हेमराज के कत्ल में किसी भी प्रकार की भूमिका नहीं अदा की है। सीबीआई के सूत्र इस बात की तरफ सकेंत करते है कि वारदात की रात तलवार दंपती घर पर ही थे लेकिन उनहें घटना का पता नहीं चल सका था। इसका मतलब यह है कि आज डॉ राजेश तलवार को अगर कोर्ट रिहा करता है तो सीबीआई उनकी रिहाई का विरोध नहीं करेगी।
कत्ल नौकरों ने ही किया
सीबीआई ने अपनी तमाम वैजानिक जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती लग रही है जिसमें यह कहा जा रहा है कि आरुषि तलवार की हत्या राजकुमार , विजय मंडल , कृष्णा में से किसी एक ने की हैं और हत्या का राज छ़ुपाने के लिए बाद में इन लोगों ने ही हेमराज का भी कत्ल कर दिया है। वारदात की रात कृष्णा वहां मौजूद था । कहा जा रहा है कि राजकुमार ने अपने नारको एनालिसिस टेस्ट में कहा है कि तिनों ने मिलकर आरुषि को मारा है और हेमराज कत्ल का राज न उगल दे इसलिए बाद में उसका भी कत्ल कर दिया गया है।
सबूतों की तलाश जारी
लेकिन यह तमाम दावे वैज्ञानिक जांच के आधार पर किए जा रहें है। और हत्या की रात इस्तेमाल औजार सीबीआई के हाथ अभी तक नहीं लगे है। जब तक सीबीआई को हत्या में शामिल औजार नहीं मिलता है तब तक कोर्ट में उसका दावा कमजोर माना जाएगा। कानून की नजर में नारको एनालिसिस टेस्ट को महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर मान्यता नहीं है यह केवल अपराधी को पकड़वाने में मददगार तो हो सकता है लेकिल अह़म सबूत नहीं माना जा सकता।
अगर अपराधी खुद कोर्ट में नारकोटेस्ट के दावे को खारिज कर दे और कहें कि उसने ऐसा नहीं कहा है तो यहां सीबीआई को सबूतों के आधार पर अपनी बात साबित करनी होगी। और जब तक हत्या में शामिल हथियार नहीं मिल जाता या फिर अपराधी खुद कोई इकबालिया बयान कोर्ट में दे जिसमें वह अपने गुनाह को कबूल कर ले तक तक सीबीआई का पक्ष कमजोर ही माना जाएगा।