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हनुमानजी से सीखें मैनेजमेंट

भोपाल. दुनिया में शायद ही कोई मिथकीय और ऐतिहासिक पात्र होगा जो अपने जीवन में कभी न कभी असफल न हुआ हो। जिंदगी का सच तो यही है कि असफलताएं सफलता तक पहुंचने का पड़ाव हुआ करती हैं, लेकिन रामचरित मानस के हनुमानजी हिन्दुस्तान के एकमात्र ऐसे विलक्षण चरित्र हैं जो जीवन में कभी असफल नहीं रहे।

उन्होंने मुश्किल से मुश्किल और जोखिम भरे काम किए और वे नियत समय के भीतर। हनुमानजी के इन्हीं गुणों से प्रभावित होकर डॉ. विजय अग्रवाल ने ‘सदा सफल हनुमान’ पुस्तक लिखी। गुरुवार को होटल निसर्ग में मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. विजय अग्रवाल ने यह जानकारी दी। लेखक पूर्व में ‘समय आपकी मुट्ठी में’ और ‘मन के साधे सब साधे’ विषय पर भी पुस्तक लिख चुके हैं।

अपनी तीसरी पुस्तक के बारे में श्री अग्रवाल ने बताया हनुमानजी की सफलता और मैनेजमेंट गुर बताती इस पुस्तक के द्वारा आम जन को उनकी संचार क्षमता, दूरदर्शिता, मर्यादा, निर्भयता, कर्म, काम का चुनाव, नेतृत्व करने की क्षमता, दृष्टिकोण में लचीलापन, प्रकृति से सामंजस्य, योजना बनाने और लागू करने का उनका तरीका और आध्यात्मिकता की शक्ति जैसी मैनेजमेंट की प्रमुख बातों की जानकारी मिलेगी। हनुमानजी के चरित्र को वर्तमान की प्रबंधन प्रणाली से जोड़कर विश्लेषित किया गया है।

लेखक ने इन सभी तत्वों का बड़ा गहन विश्लेषण रामचरित मानस की घटनाओं, संवादों, कार्यप्रणालियों तथा दोहों के शब्दों और उनके अर्थो के माध्यम से किया है। यही वजह रही कि पुस्तक में उनका हर एक रूप उभर कर सामने आया है। इस मौके पर मंजुल पब्लिशिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास रखेजा और जनरल मैनेजर मनोज कुलकर्णी सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे।





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