भोपाल. हमीदिया अस्पताल से निकलने वाले लिक्विड बायोमेडिकल वेस्ट को बड़े तालाब में मिलने से रोकने के लिए विशेष ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की जरूरत है। मानवाधिकार आयोग ने पीएचई को एफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाने को कहा है। आयोग ने इस मामले में 26 अगस्त को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को भी तलब किया है।
आयोग ने इस बीच संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बायो मेडिकल वेस्ट से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए अपनी संयुक्त रिपोर्र्र्र्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से भी इस और ध्यान देने के लिए कहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मानव अधिकार आयोग ने आठ जुलाई को संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पीएचई विभाग ने प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत की है। इसके मुताबिक हमीदिया के बायोमेडिकल वेस्ट के ट्रीटमेंट के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इस प्लांट पर करीब एक करोड़ 14 लाख रुपए की लागत आएगी। ऐसा ही प्लांट इंदौर के एमवाय अस्पताल में लगाया गया है।
क्या है ईटीपी में
अस्पताल में एक ऐसा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा जिसमें सीवर के साथ आ रहे लिक्विड बायो मेडिकल वेस्ट को ब्लीचिंग पावडर से नष्ट किया जाएगा। इसमे पांच अलग-अलग टैंक होंगे जिनके माध्यम से सीवर का ट्रीटमेंट कर इसे नाले में बहाया जाएगा।
इंसीनरेटर पर्याप्त नहीं
हमीदिया से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट को ठिकाने लगाने के लिए अस्पताल परिसर में इंसीनरेटर लगाया गया है, लेकिन इसकी क्षमता काफी कम है। अस्पताल से निकलने वाले अधिकतर वेस्ट को नगर निगम डिस्पोज कर रहा है।
इन क्षेत्रों में होती है जलापूर्ति
बड़े तालाब से खासकर पुराने शहर में पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें ईदगाह हिल्स,कोहेफिजा,सिंधी कालोनी,माडल ग्राउंड,मोती मस्जिद,गिन्नौरी,शाहजहांनाबाद,नूरमहल रोड, प्रोफेसर्स कालोनी आदि इलाके शामिल हैं। इससे करीब आठ लाख की आबादी प्रभावित होती है।
कैसे हो प्रबंधन
>> अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के रासायनिक शोधन के लिए एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना चाहिए।
>> अस्पताल से निकलने वाले बायो वेस्ट का कुछ हिस्सा ही इंसीनरेटर में भेजा जा रहा है बचे हुए वेस्ट को नगर निगम डिस्पोज कर रहा है।
>> अस्पताल को बायो वेस्ट के डिस्पोजल का रिकार्ड रखना चाहिए, जो की नहीं रखा जा रहा।
पानी का सामान्य ट्रीटमेंट
बड़े ताबाब के पानी में घातक अपशिष्ट मिलने के बावजूद इसका ट्रीटमेंट सामान्य तरीके से किया जाता है। यहां का पानी सप्लाई से पहले नगर निगम के ईदगाह, बादलमहल, शिमला और बैरागढ़ ट्रीटमेंट प्लांट पर साफ किया जाता है। इसके शोधन में मात्र ब्लीचिंग और एलम का प्रयोग किया जाता है। बरसात के मौसम में पानी साफ करते समय एलम की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
क्या हैं हालात
राजधानी में बड़े तालाब से की जाने वाली जलापूर्ति में सबसे बड़ा खतरा हमीदिया अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का है। बायो मेडिकल वेस्ट ने बड़े तालाब में मिलकर भोपाल की करीब आठ लाख आबादी के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया है। इस वेस्ट का द्रव बिना किसी उपचार के सीधे बड़े तालाब में छोड़ा जा रहा है।
तालाब का प्रदूषित पानी राजधानी की 40 फीसदी आबादी के लिए घातक हो सकता है। खासकर बरसात के मौसम में तालाब का पानी लोगों को बीमार कर सकता है। तमाम प्रयासों के बावजूद अस्पताल से निकला द्रव अपशिष्ट तालाब में सीधे छोड़ा जा रहा है।
अस्पताल से निकलने वाले वेस्ट में ग्लूकोज, यूरिन, रक्त आदि पदार्थ होते हैं। पानी में ग्लूकोज मिलने पर यह सूक्ष्म जीवों को बढ़ावा देता है। यूरिन में पाए जाने वाले क्रिएटिन में प्रोटीन होता है, पानी में मिलने के बाद यह उसकी सांद्रता बढ़ाता है।
हमीदिया से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के लिए 0.75 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
-एमके श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीएचई