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जब थाना प्रभारी हुए पानी-पानी

police ग्रेजों के जमाने के जेलर दिखने वाले बैरागढ़ थाना प्रभारी अपनी वर्दी के कारण हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनकी वर्दी हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। पांच दिन पहले भी केंद्रीय जेल में ऐसा ही हुआ। जेल में नेताओं की आवभगत चल रही थी। चाय-नाश्ता और भोजन की व्यवस्था से नेता खासे प्रभावित थे।

कई नेताओं ने थाना प्रभारी से कहा- ‘जेलर साहब मजा आ गया।’ थाना प्रभारी ने पहले तो ज्यादा ध्यान नहीं दिया, मुस्कुराकर उनका अभिवादन किया। जब अति हो गई तो उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने शरमाते हुई आखिर में बोल ही दिया- ‘साहब! मैं जेलर नहीं, बैरागढ़ थाना प्रभारी हूं।’ नेताओं का कहना था कि हमें पहचाने में गलती हो गई, लेकिन आप दिखते जेलर जैसे ही हैं। इसके बाद थाना प्रभारी ‘पानी-पानी’ हो गए।

ज्ञापन को लेकर पुलिस में मतभेद
नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रदर्शनकारी शुक्रवार को रैली निकालकर ज्ञापन देंगे, लेकिन ज्ञापन कहां लिया जाए, इसको लेकर पुलिस ने बैठक में चर्चा की। नए शहर के अधिकारी चाहते हैं कि उनकी रैली को बाणगंगा पर रोककर ज्ञापन लिया जाए, लेकिन पुराने शहर के अधिकारी इस पर सहमत नहीं हैं।

उनकी राय है कि रैली को रोशनपुरा पर ही रोका जाए। पुराने शहर के अधिकारी नहीं चाहते कि प्रदर्शनकारी बाणगंगा चौराहे तक आएं। यदि वे आते हैं तो उन्हें काफी मशक्कत करना पड़ सकती है। पुलिस अधिकारी अभी तक तय नहीं कर सके हैं कि रैली को कहां रोका जाए। जो पावरफुल अधिकारी होगा, बात उसी की मानी जाएगी।

जेल में मनी पिकनिक
पांच दिन पहले इंदौर में हुई हिंसा को लेकर पॉलीटेक्निक चौराहे पर प्रदर्शन कर सीएम हाउस में घुसने की कोशिश करने वाली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने बलपूर्वक गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल भेजा था। गिरफ्तार नेताओं के जेल पहुंचते ही जेल अधीक्षक ने उनकी खूब आवभगत की। तुरंत गरमा-गरम चाय के साथ नाश्ते की व्यवस्था की गई।

नेतागण, भजिए और चाय का मजा लेकर ठहाके लगा रहे थे। चाय-नाश्ता खत्म हुआ ही था कि गरमा-गरम भोजन तैयार हो गया। पंगत में बैठकर नेताओं ने स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाया। दो-तीन घंटे जेल में यही सब हुआ। बाद में नेताओं को रिहा कर दिया गया। जेल अधीक्षक की उदारता और व्यवस्था से नेता भी प्रभावित हो गए। प्रदर्शन से नेताओं की गिरफ्तारी भी हो गई और पिकनिक भी मन गई। केवल पुलिस परेशान रही। जेल में उनसे चाय के लिए भी नहीं पूछा गया। इससे अच्छा प्रदर्शन और क्या हो सकता है।

टीटी नगर का टेंशन
राजधानी में टीटी नगर ही एकमात्र ऐसा थाना है, जहां तैनात पुलिसकर्मियों का अधिकांश समय तनाव में गुजरता है। विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद पुलिसकर्मी सोच रहे थे कि उन्हें अब राहत मिलेगी, लेकिन गुरुवार से टीनशेड पर नर्मदा बचाओ आंदोलन के धरने ने उनकी मुसीबतें बढ़ा दीं। पुलिस यहां दो पाटों के बीच पिसती दिखाई दे रही है।

एक तरफ आंदोलनकारी हैं और दूसरी तरफ व्यवसायी। इस बार आंदोलनकारियों ने जहां टेंट लगाया है, वह स्थान दुकानों के आगे पार्किग और गाड़ी सुधारने उपयोग आता था। व्यापारी पुलिस से गुहार कर रहे हैं कि अन्य धरने भले ही चलते रहें, पर नर्मदा बचाओ आंदोलन का धरना जल्द खत्म करवाया जाए।

पत्नी प्रताड़ित अफसर एसआई पर मेहरबान
पुलिस मुख्यालय में पदस्थ एक आईपीएस अफसर अपनी पत्नी और साले से परेशान हैं। उन्होंने इनकी शिकायत तक की है। इन अफसर की एक महिला सब इंस्पेक्टर पर विशेष मेहरबानी है। मेहरबानी के चलते सब इंस्पेक्टर कभी ड्यूटी आती हैं तो कभी नहीं भी, उनसे कोई पूछने वाला नहीं है। स्टाफ को साहब से कोई काम होता है तो वे एसआई को आगे कर देते हैं।

साहब उनकी बात टाल नहीं पाते और उन्हें काम करना पड़ता है। यही हाल ट्रेनिंग में जाने वालों का है। लिस्ट में एसआई का नाम देख साहब तुरंत अनुमति दे देते हैं। सब इंस्पेक्टर का जिले में तबादला हो गया है, लेकिन साहब उन्हें रिलीव नहीं कर रहे हैं। एसआई ने पहले तबादले के लिए मशक्कत की थी, अब रिलीव होने के लिए करना पड़ रही है।
-सुनीत सक्सेना





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