जयपुर.
कल तक जिन कागजों को अत्यंत गोपनीय बताकर दुनिया भर से छुपाया जा रहा था, आज वो न सिर्फ इंटरनेट के जरिए दुनिया भर के सामने हैं बल्कि ब्लॉगर्स इन आईएइए डॉक्यूमेंट्स का मजाक बना रहे हैं और बाकी लोग भी इसका मजा लूट रहे हैं।
हिन्दी ब्लॉग्स पर भी :
हिन्दी के ब्लॉग मसिजीवी पर न सिर्फ इन आईएईए डॉक्यूमेंट्स का लिंक दिया है, बल्कि इस पोस्ट का शीर्षक ही दिया है, ये लीजिए आईएईए से नाभकीय समझौते का मसौदा।
मसिजीवी ब्लॉग लिखने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के लेक्चरर विजेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार, कल तक जिन कागज पत्रों को भारतीय विदेशमंत्री यह कहकर दिखा नहीं रहे थे कि कम अक्ल भारतीयों को दिखाना ठीक नहीं है। जब तक अमरीकी आका नहीं कहेंगे नहीं दिखाएंगे। वह 24 घंटे बीतते न बीतते सबके सामने है। यदि आपने अब तक पढ़ा न हो और इच्छुक हों तो मसौदा इस लिंक पर उपलब्ध है।साथ में इस मसौदे का लिंक भी दिया गया है।
http://www.armscontrol.org/pdf/20080709_India_safeguards.pdf
वहीं एक विदेशी ब्लॉगर स्टीव शिकल्स अपने ब्लॉग का शीर्षक ही देते हैं भारत के आईएईए के साथ एटमी समझौते में कई कमियां हैं।वे कई ऐसी कमियों की तरफ इशारा करते हैं, जो भारत के लिए नुकसानदेह हैं। जैसे भारत के परमाणु रिएक्टर्स में अब विदेशी भी तांक-झांक कर सकेंगे।
वहीं सतीश नवाडा अपने ब्लॉग रेंडम थॉट्स में लिखते हैं कि लेफ्ट ने इस डील में जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया है वे उचित हैं , यहां तक की वे आईएईए मसौदे को अब तक लोगों के सामने नहीं लाए जाने को लेकर भी खुश नहीं है।
वहीं एक और भारतीय ब्लॉगर नो कैबेज (छदम नाम) लिखते हैं कि आखिरकार भारत ने एटमी डील का ड्राफ्ट(मसौदा) आईएईए को सौंप ही दिया है। साथ ही वे पूरे ड्राफ्ट का लिंक भी अपने पोस्ट के अंत में देते हैं।