नई दिल्ली. भारत-अमेरिकी परमाणु करार के सिलसिले में सुरक्षा मानकों के समझौते का मसौदा आईएईए में भेजने के सरकार के कदम पर वामदलों व भाजपा की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच कांग्रेस ने गुरुवार को कहा है कि यदि सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई तो वह अपना कदम वापस ले लेगी।
एआईसीसी की मीडिया सेल के चेअरमैन वीरप्पा मोइली ने कहा कि वामदलों द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बावजूद संसद में कांग्रेस के नेतृत्ववाली सरकार के पास बहुमत है। उन्होंने कहा, ‘यदि हम विश्वास मत हासिल नहीं कर पाते हैं तो मसौदे की मंजूरी के लिए आईएईए से उसके बोर्ड ऑफ गर्वनर्स की बैठक बुलाने के आग्रह को वापस ले लिया जाएगा।’
क्यों गरमाया मामला : गौरतलब है कि एटमी डील के संबंध में भारतीय परमाणु संयंत्रों के सुरक्षा मानकों पर आईएईए के साथ समझौते का मसौदा बुधवार को एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को मंजूरी के लिए सौंपा गया था। इसके पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को कहा था कि संसद में विश्वास मत हासिल करने के बाद ही सरकार आईएईए में जाएगी।
* ‘हम जानते हैं कि करार से मुकाबला कैसे करना है। हम राजनीतिक रूप से सरकार के लिए करार पर आगे बढ़ना असंभव बना देंगे।’
प्रकाश करात, माकपा महासचिव
* ‘आईएईए में जाने का फैसला चोरी-छिपे लिया गया है।’
लालकृष्ण आडवाणी, वरिष्ठ नेता, भाजपा
* ‘ऐसा करने के लिए यूपीए के साथ जनाधार कहां से आ गया?’
राजीव प्रताप रूडी, भाजपा प्रवक्ता
* ‘राई का पहाड़’ बनाने की कोशिश की जा रही है। वे लोग यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक से पहले ही संसदीय समर्थन की कवायद शुरू हो जाएगी।’
अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस प्रवक्ता