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आईएएस के फार्म तक सरकारी पैसे से सड़क

चंडीगढ़. road पंजाब के एक सीनियर आईएएस दंपती ने रोपड़ के खड्ड बठलौर गांव के पास अपने 35 एकड़ के फार्म हाउस तक एक किलोमीटर लंबी सड़क बनवाई मगर इस पर खर्च रकम सरकारी खजाने से निकाली।

यह रकम 17 लाख 74 हजार बताई गई है। हालांकि कागजों में इस सड़क को गांव के श्मशानघाट को जाता दिखाया गया है, लेकिन इसके शुरू में ही गेट लगा है, जिस पर लिखा है, ‘इसके आगे जाना मना है।’

विभाग ने इस सड़क पर तीन लाख और खर्च करने की मंजूरी भी दी है। यह सारी धनराशि वित्त विभाग के आदेश पर लघु बचत विभाग के जिला कार्यालय द्वारा पीडब्ल्यूडी व अन्य विभागों को जारी की गई है। ये आईएएस दंपती हैं डीएस कल्हा और गीतिका कल्हा। डीएस कल्हा वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और गीतिका टूरिज्म विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं।

विभिन्न विभागों ने कराया है काम : 12 लाख रुपए 2007-08 के हेडक्र्वाटर कोटे से गांव खड्ड बठलौर की सड़क की मरम्मत के लिए एक्सईएन कंस्ट्रक्शन डिवीजन लोक निर्माण विभाग रोपड़ को जारी किए गए हैं। 5 लाख 74 हजार 89 रुपए एक्सईएन पंचायती राज पीडब्ल्यूडी (सीएंडएम) डिवीजन रोपड़ को गांव खड्ड बठलौर की गलियों के निर्माण के लिए जारी किए दिखाए गए हैं।

हाल ही में विभाग ने एक्सईन पीडब्ल्यूडी को तीन लाख रुपए और इसी सड़क के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए जारी किए हैं। आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें ऐसे नहीं बनतीं। सरकार ने हर विधायक को अपने क्षेत्र में 20 किमी. नई सड़कें सालाना बनवाने को अधिकृत किया है। विधायक की सिफारिश पर ही सड़क बनाई जाती है। उसमें भी मिट्टी गांव वासियों को डालनी होती है।

परंतु इस सड़क को बनाने के लिए विधायक की सिफारिश जरूरी नहीं समझी गई। मिट्टी विभाग ने डलवाई। आमतौर पर लिंक सड़कों के निर्माण में बर्म नहीं लगाए जाते।

परंतु इस सड़क के निर्माण कार्यो में खासतौर पर बर्म बनाए गए हैं। इस सड़क के साथ काजवे व एक पार्किग भी बनाई गई है। गांव की गलियों-नालियों व सड़कों की हालत खस्ता है, जबकि इस सड़क को टूटने से बचाने के हरसंभव उपाय किए गए हैं।

यह कल्हा साहिब का करिश्मा
जिस सड़क को बनवाने के लिए गांव वाले वर्षो से नेताओं के चक्कर काट रहे थे उसे उन्होंने चंद दिनों में बना दिया। गांव के सरपंच प्रकाश चंद इसे कल्हा साहिब का करिश्मा मानते हैं। उनके मुताबिक गांव को पिछले पांच सालों से गलियों, नालियों व अन्य कामों के लिए बमुश्किल 5-6 लाख ही सरकार से मिले हैं। यह सड़क किस तरीके से बनी है, उन्हें कुछ पता नहीं है।

उन्हें इस संबंधी कोई जानकारी नहीं है कि यह राशि कहां लगाई गई है, न ही उन्हें इससे कोई लेना देना है। वित्त विभाग से जो आदेश आए, उन्होंने उसके हिसाब से धनराशि जारी कर दी।
- परमिंदरपाल सिंह सोढ़ी, जिला बचत अधिकारी, रोपड़

इस सड़क का निर्माण मेरी जानकारी में नहीं है और न ही मैंने इसके लिए सिफारिश की थी।
-संत अजीत सिंह, क्षेत्र विधायक

नई बनी सड़क पर मेरा फार्म हाउस जरूर है, परंतु उस सड़क से मेरा कोई लेना देना नहीं है। वह सड़क तो श्मशानघाट को जाती है। पंजाब सरकार की योजना है कि राज्य के हर गांव के श्मशानघाट की सड़क पक्की की जाए। जहां तक फंडिंग का संबंध है, उस संबंधी वे कुछ नहीं कह सकते। सड़क को बनाने के लिए बाकायदा ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया है। विशेष तौर पर बने बर्म व काजवे संबंधी भी वे कुछ नहीं कह सकते।
-डीएस कल्हा, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, वित्त विभाग, पंजाब





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