जयपुर. जेलों में बंद आंदोलनकारियों को छोड़ने और उनके मुकदमे वापस लेने के लिए सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देने वाले राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष कैप्टेन हरप्रसाद तंवर ने कहा है कि सरकार ने मुकदमे वापसी की प्रक्रिया तेज कर दी है।
किरोड़ीसिंह बैसला को मीटिंग के लिए बुधवार सुबह ही जयपुर बुलवा लिया गया था। भाजपा के केन्द्रीय और स्थानीय नेताओं ने उन्हें दो दिन में मुकदमे वापस लेकर आंदोलनकारियों को रिहा करने का आश्वासन दिया है।
इसके बाद उन्होंने 48 घंटे बीतने पर अगली कार्रवाई करने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। कैप्टेन ने कहा कि समझौते के मुताबिक सरकार को गुर्जरों के सभी मुकदमे वापस लेने होंगे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर बैसला को भरोसा होगा, मुझे नहीं है। इसीलिए मैं बैसला के साथ सरकार से होने वाली मीटिंग में नहीं गया। आंदोलन अभी स्थगित नहीं किया गया है। जब तक सभी मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे, आंदोलनकारियों को छोड़ा नहीं जाएगा और गुर्जरों को आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन स्थगित नहीं किया जाएगा।
इधर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे किरोड़ीसिंह बैसला ने बुधवार को जयपुर में गृह विभाग के प्रमुख सचिव एस.एन.थानवी से मुलाकात की। थानवी ने बैसला को मुकदमे वापस लिए जाने के संबंध में की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी। बैसला को मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया और कहा गया कि जहां तक संभव होगा वापस लिए जाने योग्य मुकदमे जल्द ही वापस ले लिए जाएंगे।
इनका कहना है
‘मैं सरकार से संतुष्ट’
मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक सरकार ने जो कार्रवाई की है, उससे मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं। मुकदमे वापस लेने में इतना समय लग गया तो और 24 घंटे का समय सही।
- किरोड़ीसिंह बैसला, संयोजक, राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति
न साफा और न ही मालाएं पहनेंगे बैसला
इससे पहले बैसला ने हिंडौन में घोषणा की कि जब तक गुर्जर आंदोलनकारी जेल से रिहा नहीं हो जाते, तब तक वे न तो समाज के मंच पर साफा पहनेंगे और न ही माला।