भोपाल.
मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब विरोध जता रहे विपक्षी सदस्यों द्वारा नारेबाजी के बीच अध्यक्ष की आसंदी पर पर काला कपड़ा फेंका गया हो।
आपत्तिजनक नारों के बीच बुधवार को 12वीं विधानसभा के अंतिम सत्र का समापन भारी तनाव के बीच हुआ। तनाव की हालत यह थी कि विदाई के मौके पर पर एक दूसरे को धन्यवाद देने और आभार जताने की परंपरा को भी निभाया नहीं जा सका।
नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी समेत सदन में मौजूद सभी कांग्रेस विधायक विरोध स्वरूप गले में काला गमछा डालकर आए थे। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने तीन जुलाई को बंद के इंदौर और अन्य शहरों में हुई हिंसा की न्यायिक जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष जमुनादेवी को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष गिरफ्तार किए जाने पर कलेक्टर, एसपी को सस्पेंड करने की मांग पर भी अड़ा हुआ था।
जमुनादेवी का आरोप था कि पुलिस उनकी हत्या करना चाहती थी। काला कपड़ा घुमा रहीं नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए चेतावनी दी कि यह न भूलें की आप सदन के अंदर हैं और इसके लिए निंदा प्रस्ताव लाया जा रहा है। हालांकि बाद में संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा प्रस्तुत निंदा प्रस्ताव पर अध्यक्ष ने कहा मप्र विस की अच्छी परंपरा रही है उसे देखते हुए इसे अस्वीकार करता हूं।
इसके बाद अध्यक्ष ने सभी का आभार जताया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। इसी के साथ 7 जुलाई से 11 जुलाई तक चलने वाला सत्र तीसरे दिन ही समाप्त हो गया।
इसके पूर्व सुबह साढ़े दस बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने एलान कर दिया कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद ही प्रश्नकाल चलने देंगे।