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अब सरकार बचाने के करार

नई दिल्ली.जी-8 सम्मेलन में भाग लेने जापान गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए काफी असहज स्थिति पैदा करते हुए वाम मोर्चे ने अंतत: मंगलवार को यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इस बीच, सपा ने यूपीए सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। बुधवार को दोपहर वामदलों के नेता राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मुलाकात कर उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपने के साथ ही उनसे आग्रह करेंगे कि वह सरकार को लोकसभा में बहुमत साबित करने को कहें।

वामदलों द्वारा समर्थन वापसी की घोषणा का इंतजार कर रही भाजपा ने राष्ट्रपति से संसद का विशेष सत्र बुलाकर सरकार से बहुमत साबित करने का निर्देश देने की मांग की है। उधर, जापान के सपोरो में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि समर्थन वापसी के बावजूद उनकी सरकार स्थिर है।

मनमोहन के बयान से झल्लाए

वाम दलों ने समर्थन वापसी की तारीख पहले 10 जुलाई तय की थी, लेकिन जापान में जी-8 बैठक में भाग लेने के लिए जाते हुए परमाणु करार पर दिए मनमोहन के बयान से वे नाराज हो गए और तत्काल समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। मनमोहन ने बयान में कहा था कि सरकार आईएईए के पास ‘इंडिया स्पेसिफिक सेफगार्ड’ पर समझौते के लिए जाएगी।

विदेश में रहते अल्पमत में आए पहले प्रधानमंत्री

यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री के विदेश में रहते हुए सरकार अल्पमत में आई हो। प्रधानमंत्री बुधवार देर रात जापान से लौटेंगे।

आपात बैठक

वाम मोर्चे की समर्थन वापसी की घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री वायलार रवि ने बताया कि प्रधानमंत्री के वापस लौटने के बाद पार्टी अगला कदम तय करेगी।

पीएम के लौटने का इंतजार क्यों नहीं: भाकपा नेता एबी वर्धन ने कहा, ‘हम क्यों करें उनके लौटने का इंतजार, जब उन्होंने हमें नजरअंदाज कर विदेशी धरती पर आईएईए के पास जाने की घोषणा की।’ वर्धन ने कहा प्रधानमंत्री ने मुंह खोला भी तो 30,000 फीट की ऊंचाई पर। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री के लौटने का इंतजार कर सकते थे, लेकिन प्रधानमंत्री अमेरिका को खुश करने के लिए ‘अतिउत्साहित’ दिखे, इसलिए पहले फैसला लेना पड़ा।

पता चल जाएगी दावे की हकीकत :

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर कि उनके पास पर्याप्त संख्याबल है, वाम नेता वर्धन ने कहा, इसीलिए हम चाहते हैं कि वे संसद में विश्वास मत हासिल करें। ‘इससे पता चल जाएगा कि उसके पास कितने एमपी हैं।’

सरकार में शामिल हों, तब दिखाएंगे टेक्स्ट: मुखर्जी की दो-टूक

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वाम नेता प्रकाश करात के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि आईएईए के सेफगार्ड समझौते का मूल पाठ भारत सरकार व आईएईए के बीच ‘विशेषाधिकारयुक्त’ गोपनीय दस्तावेज है। जो इसे देखना चाहते हैं, उन्हें पहले सरकार में शामिल होना पड़ेगा। इसे किसी तीसरी पार्टी को केवल आईएईए की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही दिखाया जा सकता है।

शक्ति परीक्षण हुआ तो

लोकसभा में शक्ति परीक्षण की स्थिति में सपा के कुछ सदस्य यदि सरकार के खिलाफ हों तो भी अजित सिंह की आरएलडी, देवगौड़ा की जेडीएस और 4 निर्दलियों के बूते सरकार 272 की संख्या तक पहुंच सकती है। वाम मोर्चे के बाहर होने के बाद और सपा के 39 सदस्यों के साथ सरकार के पास 272 सदस्यों का समर्थन है। इसमें पीडीपी, मुस्लिम लीग व मुस्लिम मजलिस पार्टी के तीन सदस्य भी शामिल हैं।

अब छोटे दलों को साधने में जुटे वामदल

वामदलों ने सरकार गिराने के लिए गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी छोटी पार्टियों को एकजुट करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीपीएम नेता प्रकाश करात ने जद (एस) प्रमुख एच डी देवगौड़ा से फोन पर बात की है। भाजपा से समान दूरी बनाए रखने के लिए रणनीति बनाई जा रही है कि अगर यूपीए सरकार विश्वास मत पेश करने से पीछे हटती है तो टीडीपी सदन में अविश्वास मत पेश करे।

भाजपा खुद अविश्वास प्रस्ताव लाने के पक्ष में नहीं

जल्द चुनावों को अपने लिए नुकसानदेह मान रही भाजपा वामदलों के समर्थन वापसी के बावजूद यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने को उत्सुक नहीं है। भाजपा परमाणु करार का विरोध करते हुए भी नजर नहीं आना चाहती। देश का मध्यम वर्ग परमाणु करार के समर्थकों में मुख्य है और यही वर्ग भाजपा का भी समर्थक है। करार का विरोध करने की स्थिति में पार्टी को डर है कि यह वर्ग कहीं उससे नाराज न हो जाए।

पार्टी के आला सूत्रों ने ‘भास्कर’ को बताया कि मंगलवार शाम की बैठक में नेताओं ने महसूस किया कि सरकार अगर बच भी जाए तो उसका ठीक से चल पाना नामुमकिन होगा। ऐसे में भाजपा को सही मौके का इंतजार करना चाहिए। तब तक पार्टी को अपने पुराने सहयोगियों से दोबारा रिश्ता कायम करने की कवायद पर ध्यान देना होगा।

चुनाव की जल्दी नहीं :

भाजपा ने चुनावी प्रचार में बढ़त लेने की तैयारियां तो शुरू कर दी हैं, मगर पार्टी बहुत जल्द चुनाव के लिए उत्साहित नहीं लगती। हालांकि पार्टी का यह भी मानना है कि अगर नवंबर तक चुनाव हो जाएं तो केंद्र के एंटी इंकमबेंसी फैक्टर का फायदा विधानसभा चुनावों में भाजपा को ही मिलेगा।

एनडीए की बैठक :

बुधवार को एनडीए नेताओं व मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें ताजा राजनीतिक स्थिति का आकलन तथा भावी रणनीति तैयार की जाएगी। शिव सेना व अकाली दल को साथ रखना एनडीए की पहली चुनौती है।

क्या कर सकती हैं राष्ट्रपति अब चूंकि ऐसी खबरें आ रही हैं कि सपा के कुछ नेता सरकार का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं, इसलिए राष्ट्रपति के पास सरकार से बहुमत साबित करने को कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

- राजू रामचंद्रन, वरिष्ठ वकील

किसी कार्यरत सरकार को सदन में विश्वास मत प्राप्त करने के लिए कहे जाने संबंधी कोई बात संविधान में नहीं लिखी है, इसलिए राष्ट्रपति को सरकार को बहुमत सिद्ध करने का कहने की कोई जरूरत नहीं है।

- शांति भूषण, पूर्व कानून मंत्री

संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास दो विकल्प मौजूद हैं- एक, या तो वे सरकार से संसद में बहुमत साबित करने को कहें या फिर उसे सपा व अन्य समर्थनकारी दलों का पत्र पेश करने का निर्देश दें।

1998 के आमचुनाव के बाद भाजपा द्वारा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने का दावा पेश करने पर तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने अटलबिहारी वाजपेयी से बहुमत साबित करने के लिए समर्थन पत्र पेश करने को कहा था। इसके बाद उन्हें इस शर्त पर प्रधानमंत्री बनाया गया था कि वे 10 दिन के भीतर बहुमत सिद्ध करेंगे।’





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