अजमेर. एक तरफ पुलिस दौरान-ए-उर्स जेबतराशों का गिरोह पकड़ कर कामयाबी के झंडे गाड़ रही है, दूसरी ओर जेबकतरों का शिकार बनने वालों की फरियाद नहीं सुनी जा रही है। मालूम हो कि उर्स के मौके पर देश के कई हिस्सों के जेबतराश गिरोह ‘कमाई’ करने अजमेर पहुंचते हैं।
दरगाह थाने की सीढ़ियों पर रविवार दोपहर करीब तीन बजे जार-जार बिलख रहे अमरावती के रहने वाले 19 वर्षीय शेख एजाजुद्दीन पुत्र शेख निजामुद्दीन ने बताया ‘मैं अकेला जियारत के लिए अजमेर आया था, यहां मेरी जेब साफ हो गई, जेब में एक हजार रुपए थे, अब घर लौटने के लिए किराया नहीं है’। इस बीच, नीचे से ऊपर जा रहे जवान ने उसे दुत्कार भाग जाने को कहा।
आसपास मौजूद लोगों में से एक ने सलाह दी-वहां दरगाह से जुड़ी कई संस्थाएं हैं, जो तुम्हारी मदद कर सकती हैं। इस पर जैसा कि एजाजुद्दीन ने बताया ‘मैं वहां गया था, उन लोगों ने पहले थाने में रिपोर्ट देने को कहा, उधर चौकी गया तो चलता कर दिया, कोई सुनता ही नहीं’।
किसी ने हमदर्दी जताते हुए उसके घर बात कराने के लिए फोन नंबर पूछे। बार-बार बिलख रहा एजाजुद्दीन बोला ‘मेरे पॉकेट में छोटी डायरी में घर के पास वाले डिब्बे वाले फोन का नंबर था, मेरे घर फोन नहीं है, मैं तो रिक्शा चलाता हूं’। उसने हिचकियां लेते हुए अमरावती का एसटीडी कोड नंबर जरूर बता दिया।
एक नौजवान ने खाने के लिए पचास रुपए देना चाहा तो अश्कों से भीगे चेहरे पर बेचारगी तारी हो गई हाथ जोड़कर वो बोला ‘मुझे खाना नहीं खाना, घर जाना है’। उधर, दरगाह के निजाम गेट पर जायरीन का सैलाब उमड़ रहा था। जगह-जगह लगे लाउड स्पीकर चीख रहे थे कहां-कौन किसका इंतजार कर रहा है।
तीन दिन में चौबीस पकड़े : पुलिस के अनुसार दरगाह इलाके पिछले तीन दिन में चौबीस जेबतराश पकड़े गए हैं। संदिग्ध लोगों की धरपकड़ की जा रही है। जेबकतरों का शिकार होने वाले ज्यादातर जायरीन पुलिस के पचड़े में पड़ने से कतराते हैं, यही कारण है कि कई बार जेबतराशों के रंगे हाथ पकड़े जाने पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते।
मालूम हो कि पुलिस की स्पेशल टीम में दो दिन पहले कोलकाता के आठ जेबतराशों को गिरफ्तार किया था। दरगाह बम ब्लास्ट मामले में शक के आधार पर पकड़े जा चुके, दिल्ली के नासिर, मुरादाबाद के अतीक और कानपुर के सईद मोटा ने उर्स, मोहर्रम और भीड़ वाले अन्य मौकों पर गिरोह के साथ जेबतराशी की वारदात करने का खुलासा किया था।