इंदौर.
पैर भले ही कफ्यरू से बंधे हैं, र्जे-र्जे पर पहरा है, सन्नाटे का साम्राज्य है लेकिन जीवन का जज्बा कहां थमता है। उसकी कल-कल धार में ममता, मोहब्बत हिलोरें ले रही है.. यही है इंदौर और यहां के लोगों की पहचान..
इंसानियत की पनाह
जब पथराव हो रहा था और दंगे ने विकराल रूप ले लिया था, उस वक्त इंसानियत ने अपना धर्म निभाया और उसकी छांव में इंसानियत को पनाह मिली। यह वाकया है सदर बाजार का, जहां हरिशंकर शर्मा के परिवार ने घबराए हुए शाहिद शेख को चार दिन से पनाह दे रखी है। कफ्यरू के कारण वह घर नहीं लौट पा रहा लेकिन उसे वहां अपनों सा ही प्यार और हिफाजत मिल रही है। परिवार वालों ने कहा जब कफ्यरू खुलेगा तो उसे घर छोड़ आएंगे।
हौसला अफजाई
दंगे के दौरान अधिकारियों के इशारे पर जान की परवाह किए बगैर मैदान में डटने वाले सिपाहियों के योगदान को शांति लौटने के बाद सभी भूल जाते हैं। मगर 34 वीं बटालियन धार के कमांडेंट रविकुमार गुप्ता ने इसे याद रखा। चंदननगर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखने के लिए उन्होंने यहां तैनात हर पुलिसकर्मी को प्रति दिन 40-40 रुपए का इनाम दिया। बेशक इनाम की राशि बहुत छोटी है पर जज्बा बहुत बड़ा है।
दिल पर नहीं कोई पहरा
जब दिल मिल जाए तो फिर कैसा पहरा। यह साबित कर दिखाया ए.बी. रोड स्थित यशराज अपार्टमेंट के रहवासियों ने मिलकर। यहां रहने वाले गौरव जैन की शादी होने वाली थी और दुल्हन सपरिवार अहमदाबाद से इंदौर आई थी। कफ्यरू के कारण रिसेपशन तो नहीं हो पाया लेकिन अपार्टमेंट वालों ने मिलकर न सिर्फ सभी को अपने-अपने घरों में रुकवाया बल्कि शादी की रस्मो रिवाज निभाई और मिलकर छोटी-मोटी पार्टी भी कर ली।